Supreme Court: 'जांच पूरी करने की समयसीमा तय करना अपवाद...', कोर्ट ने कहा- इसे बढ़ाने से हो सकती है समस्या

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालतें जांच एजेंसियों के लिए जांच पूरी करने को लेकर समयसीमा एहतियात के तौर पर नहीं, बल्कि तभी तय करती हैं जब जांच में बहुत ज्यादा देरी होने लगे। उससे लोगों को नुकसान होने का खतरा पैदा हो जाए। यह समयसीमा नियम नहीं बल्कि अपवाद है। ये भी पढ़ें - Khabaron Ke Khiladi: नल से निकले जहर ने ले ली जान, विश्लेषकों ने बताया आखिर इसका जिम्मेदार कौन दस्तावेजों में हेरफेर कर शस्त्र लाइसेंस हासिल का मामला जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एनके सिंह की पीठ ने ये टिप्पणियां इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश पर गौर करते हुए कीं। हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को दस्तावेजों में हेरफेर कर शस्त्र लाइसेंस प्राप्त करने के एक मामले में जांच पूरी करने के लिए 90 दिन का समय दिया था और आरोपी को किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण प्रदान किया था। पीठ ने कहा, समय-सीमाएं तब तय की जाती हैं जब देरी के कारण समस्या पैदा हो रही हो, न कि केवल इस आधार पर कि भविष्य में समस्या हो सकती है। ये भी पढ़ें - Kerala: ड्रग्स जब्ती मामले में केरल के पूर्व परिवहन मंत्री को तीन साल की जेल, सबूतों से छेड़छाड़ के दोषी टिप्पणी के साथ पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश को किया निरस्त पीठ ने शीर्ष अदालत के पिछले फैसलों का विश्लेषण करते हुए यह भी कहा कि अदालतों ने लगातार यह माना है कि समयबद्ध जांच का निर्देश देना नियम नहीं, बल्कि अपवाद होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, इसी सांविधानिक परिप्रेक्ष्य में अदालतों ने उपयुक्त मामलों में हस्तक्षेप किया है, जहां जांच में देरी स्वयं ही पूर्वाग्रह या नुकसान का कारण बनने लगती है। इन टिप्पणियों के साथ पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को निरस्त कर दिया। अन्य वीडियो-

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 04, 2026, 05:16 IST
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