सुप्रीम आदेश से कारोबारियों में हड़कंप: रिहायशी क्षेत्रों में व्यापार पर संकट के बादल, भविष्य को लेकर चिंता

सुप्रीम कोर्ट की ओर से देश भर के रिहायशी इलाकों में संचालित व्यवसायिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने संबंधी आदेश से जिले भर के सैकड़ों कारोबारियों की धड़कनें बढ़ गई हैं। आवासीय क्षेत्रों में कारोबार कर रहे लोग खुद के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने सरकार से इस मामले में उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में मजबूती के साथ पैरवी करने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने 22 सितंबर को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्देश दिए थे कि जहां मास्टर प्लान या सरकारी रिकॉर्ड में जमीन सिर्फ रिहायशी दर्ज है वहां अगर दुकान, कोचिंग, जिम, क्लीनिक, होटल, रेस्टोरेंट या गोदाम चलता मिला तो उसे पहले चरण में ही सील किया जाए, हालांकि इस मामले में अभी 23 नवंबर को और सुनवाई होनी है। हल्द्वानी, नैनीताल, भीमताल, भवाली, रामनगर समेत जिले के सभी छोटे बड़े कस्बों व नगरों के रिहायशी क्षेत्रों में सैकड़ों छोटी बड़ी दुकानें व अन्य प्रतिष्ठान मौजूद हैं। रिहायशी क्षेत्र चिह्नित ही नहीं कुमाऊं के सबसे बड़े कारोबारी शहर हल्द्वानी में न तो टाउन प्लानिंग विभाग ने और न ही नगर निगम ने रिहायशी क्षेत्र चिह्नित किए हैं। टाउन प्लानिंग विभाग के अधिकारियों के मुताबिक शहर का टाउन प्लान अभी नहीं बना है। नगर आयुक्त परितोष वर्मा ने बताया कि निगम में कोई ऐसा दस्तावेज या मैप नहीं है जिसमें शहर के रिहायशी इलाकों को चिह्नित किया गया हो। ऐसे में यहां सुप्रीम कोर्ट का आदेश लागू होगा भी या नहीं इसे लेकर संशय है। शहर के आवासीय क्षेत्र लामाचौड़, गौलापार, फतेहपुर, कठघरिया, भगवानपुर, लोहरियासाल, ब्लाक, ऊंचापुल, बिठौरिया, गैस गोदाम रोड, कमलुवागांजा रोड, लालडांठ, पीलीकोठी, छड़ैल, पंचायतघर, रामपुर रोड, जज फार्म, डहरिया, ईको टाउन, जेके पुरम, रूपनगर, बमौरी, मुखानी, नवाबी रोड, आदर्श नगर, हीरा नगर, तल्ला व मल्ला गोरखपुर, बद्रीपुरा, कालाढूंगी रोड, आवास विकास, सुभाष नगर, वैलेजली लाज, हरिपुर कर्नल वार्ड, शीशमहल, चांदमारी, काठगोदाम, कौलटेक्स, मुखानी मानपुर, गौजाजाली, सुभाषनगर, बनभूलपुरा, जवाहर ज्योति, दमुवादूंगा आदि। यहां घरों में जिम, बुटीक, प्रॉपर्टी ऑफिस, नीचे शो रूम और ऊपर आवास, रेस्टोरेंट, खाद्यान, राशन व फल सब्जी की छोटी बड़ी दुकानें, फोटो स्टेट, बुक सेलर आदि की दुकानें संचालित हैं। न्यायालय का आदेश हाउसिंग सोसायटी के लिए तो ठीक है लेकिन जहां पारंपरिक बाजार हैं उनके लिहाज से सोचने की जरूरत है। पहाड़ी इलाकों में तो बाजार ही लोगों का रोजगार है और वहीं उनका घर भी है। पर्वतीय भौगोलिक स्थिति में अलग-अलग स्थान पर व्यावसायिक गतिविधियां करना मुश्किल होगा। कई लोग बेरोजगार हो सकते हैं।-अधिवक्ता ललित जोशी,जजी कोर्ट हल्द्वानी पहाड़ में स्थानाभाव के साथ बेरोजगारी भी है। यह फैसला पहाड़ के लोगों के लिए ठीक नहीं है। तराई के क्षेत्रों में कामर्शियल भूमि उपलब्ध है वहां यह लागू किया जा सकता है लेकिन अल्मोड़ा, नैनीताल, पिथौरागढ़ इन क्षेत्रों में लोगों के सामने और भी बेरोजगारी का संकट छा जाएगा।-अधिवक्ता राजन मेहरा, जजी कोर्ट हल्द्वानी रिहायशी इलाकों में कारोबारी गतिविधियों को प्रतिबंधित करने का आदेश उचित है। आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक संबंधित गतिविधियों से समाज दूषित हो रहा है। मनोरंजन गतिविधियों के लिए आने वाले सैलानियों के पहनावे, चाल-चलन, मादक पदार्थों के सेवन का असर युवा पीढ़ी पर पड़ रहा है। रिहायशी क्षेत्रों पर्यटन कारोबार कतई नहीं होना चाहिए। - सुशील कुमार शर्मा, जिला शासकीय अधिवक्ता नैनीताल व्यापारियों के हितों और रोजगार की रक्षा के लिए संगठन पूरी तरह सक्रिय है। उम्मीद है कि अगली तारीख पर सरकार व्यापारियों का पक्ष मजबूती से रखेगी। ताकि किसी भी व्यापारी को आर्थिक नुकसान न झेलना पड़े। इस विषय पर जल्द ही प्रदेश सरकार के उच्चाधिकारियों से मुलाकात की जाएगी।- पुनीत टंडन, अध्यक्ष, मां नैना देवी व्यापार मंडल नैनीताल व्यवस्थित कॉलोनियों के लिए यह नियम सही हो सकता है, लेकिन पहाड़ में जैसी छोटी जगहों के लिए यह व्यावहारिक नहीं है। जहां विकास प्राधिकरण लागू नहीं है, वहां क्या व्यवस्था होगी होम-स्टे इस दायरे में कैसे आएंगे, यह स्पष्ट नहीं है। आदेश में कामर्शियल और रेजिडेंशियल से संबंधित कई इफ एंड बट हैं, जिन्हें स्पष्ट करना जरूरी है। - मारूति साह, अध्यक्ष, तल्लीताल व्यापार मंडल नैनीताल जीएसटी की ओर से छोटे व्यापारियों को कर से पहले ही राहत दी गई है। मानवीय दृष्टिकोण से रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियां चलाने की स्वीकृति छोटे व्यापारियों को मिलनी चाहिए। उसकी बहुत ज्यादा बिक्री होती नहीं है और पास-पड़ोस की बिक्री से ही उसका घर चलता है। -राजीव अग्रवाल, जिलाध्यक्ष, प्रांतीय नगर उद्योग व्यापार मंडल रिहायशी इलाके में अगर कामर्शियल जमीन है और नगर निगम के सारे टैक्स देते हैं, तो ऐसे व्यवसाइयों को राहत देनी चाहिए। अगर जमीन घरेलू है और व्यवसाय चल रहा है तो ऐसे में सुप्रीमकोर्ट के मानकों के हिसाब से कार्रवाई की जाए। -दलजीत सिंह दल्ली, प्रदेश उपाध्यक्ष देवभूमि व्यापार मंडल।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 14, 2026, 12:04 IST
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