Delhi NCR News: बंद बिजली कनेक्शनों पर बांट दी 42.26 करोड़ रुपये की सब्सिडी

200 यूनिट से ज्यादा खपत वाले उपभोक्ताओं को कम खपत वालों से 70% अधिक सब्सिडी, 400 यूनिट सीमा का आधार भी स्पष्ट नहींसंदीप वर्मानई दिल्ली। दिल्ली में सस्ती बिजली के सरकारी दावों के बीच नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट ने बिजली सब्सिडी के प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। वित्तीय वर्ष 2019-20 से 2022-23 की अवधि से संबंधित रिपोर्ट के अनुसार, सब्सिडी का लाभ वास्तविक और पात्र उपभोक्ताओं तक सीमित करने के लिए पर्याप्त जांच नहीं की गई। कैग ने पाया कि लंबे समय से शून्य बिजली खपत वाले कनेक्शनों पर भी सरकार ने 42.26 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी।रिपोर्ट के मुताबिक, 0 से 200 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले करीब 30 लाख उपभोक्ताओं को सालाना औसतन लगभग 6,000 रुपये की सब्सिडी मिली, जबकि 200 यूनिट से अधिक खपत वाले करीब 16.60 लाख उपभोक्ताओं को औसतन 10,000 रुपये से अधिक की सब्सिडी मिली। यानी अधिक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं को कम खपत वालों की तुलना में करीब 70 प्रतिशत अधिक सब्सिडी मिली। कैग ने यह भी सवाल उठाया कि 400 यूनिट तक सब्सिडी देने की सीमा तय करने के पीछे सरकार के रिकॉर्ड में ठोस आधार या स्पष्ट औचित्य नहीं है। इसके चलते करीब 80 प्रतिशत घरेलू उपभोक्ता सब्सिडी के दायरे में आ गए। ताले लगे और बंद घरों पर इस तरह बरसी मेहरबानीकैग के अनुसार, महीनों तक शून्य खपत वाले बिजली कनेक्शनों पर भी डिस्कॉम ने सब्सिडी का दावा किया और सरकार ने भुगतान किया। 12 माह से अधिक समय से बंद 50 हजार से ज्यादा कनेक्शनों पर 17.81 करोड़ रुपये सब्सिडी मद में खर्च किए गए। 6 से 11 महीने तक बंद रहे 92 हजार से अधिक कनेक्शनों पर11.88 करोड़, तो 3 से 5 महीने तक बंद रहे 1.76 लाख से अधिक कनेक्शनों पर 12.57 करोड़ रुपये खर्च हुए। कैग ने लंबे समय से निष्क्रिय कनेक्शनों पर सब्सिडी को सार्वजनिक धन का व्यर्थ खर्च बताया है। बकाया बढ़ा, टैरिफ शॉक का खतरारिपोर्ट के अनुसार, 2014-15 के बाद दिल्ली में बिजली टैरिफ में संशोधन नहीं हुआ। बिजली खरीद की लागत और उपभोक्ताओं से वसूली के बीच अंतर बढ़ने से डिस्कॉम की नियामक परिसंपत्तियां बढ़ती गईं। इनकी राशि 2019-20 के 9,063 करोड़ से बढ़कर 31 मार्च 2021 तक 27,200.37 करोड़ हो गई। कैग ने चेताया कि इस अंतर का समय पर समाधान नहीं हुआ तो भविष्य में उपभोक्ताओं पर भारी टैरिफ बढ़ोतरी का बोझ पड़ सकता है या सरकार को राजकोष से बड़ी रकम देनी पड़ सकती है।सरकारी खजाने पर बढ़ता बोझबिजली सब्सिडी का दिल्ली सरकार की कुल सब्सिडी में हिस्सा 66.96 से 70.39 प्रतिशत तक रहा। 2019-20 में 2,405.59 करोड़ की बिजली सब्सिडी बढ़कर 2022-23 में 3,161 करोड़ हो गई। कैग के मुताबिक, दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) ने 2020 में संपन्न उपभोक्ताओं को अनुचित लाभ से बचाने के लिए सब्सिडी को 3 किलोवाट तक के स्वीकृत लोड वाले उपभोक्ताओं तक सीमित करने की सलाह दी थी, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया।कैग की प्रमुख सिफारिशेंसरकार उपभोक्ता बिलिंग डेटा की सघन जांच करे, ताकि वास्तविक और पात्र लाभार्थियों को ही सब्सिडी मिले।सब्सिडी को स्वीकृत लोड की सीमा से जोड़ने संबंधी डीईआरसी की सलाह पर विचार किया जाए।सब्सिडी वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण की संभावना तलाशी जाए।बढ़ती नियामक परिसंपत्तियों के असर और भविष्य के टैरिफ पर इसके प्रभाव का सरकार विस्तृत मूल्यांकन करे।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Aug 07, 2026, 16:46 IST
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