दूसरी पारी: मनोवैज्ञानिक की सलाह- धैर्य और प्यार से सब ठीक हो सकता है
अपने पति की इस स्थिति को लेकर बहुत ज्यादा परेशान मत होइए। लगता है कि वह बाइपोलर डिसऑर्डर नामक बीमारी से गुजर रहे हैं। दरअसल, बाइपोलर डिसऑर्डर एक मानसिक बीमारी है, जिसमें व्यक्ति के मूड, ऊर्जा और गतिविधि के स्तर में अत्यधिक बदलाव आते हैं, जिसमें बहुत ज्यादा उत्साहित (उन्माद/मेनिया) और बहुत ज्यादा उदास (अवसाद) महसूस करने के दौर शामिल होते हैं, जो कई हफ्तों या महीनों तक रह सकते हैं और इससे दैनिक जीवन काफी प्रभावित होता है। पहले इसे मैनिक-डिप्रेसिव बीमारी भी कहते थे और यह मूड स्विंग्स से कहीं ज्यादा गंभीर स्थिति है, जिसके लिए अक्सर जीवन भर इलाज की जरूरत होती है। इस तरह की मानसिक स्थिति से गुजरने वाला व्यक्ति कभी किसी दिन खुद को अवसाद ग्रस्त महसूस करता है, खाने-पीने से मना कर देता है, किसी से भी बेवजह खुद से ही बतियाने लगता है और उसकी जीवन में दिलचस्पी खत्म हो जाती है। लेकिन कभी किसी दिन उसका मन अच्छा होता है, तो वह खूब बातें करने लगता है, लोगों से घुलता-मिलता है और अपने आसपास की हरेक चीज में दिलचस्पी लेने लगता है, भले ही वे चीजें कितनी ही अप्रासंगिक क्यों न हों। कुछ समय बाद यह उन्माद में भी बदल सकता है, जिसमें व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता खत्म हो जाती है। कभी-कभी उन्माद और अवसाद के लक्षण एक साथ महसूस होते हैं, जैसे उदास महसूस करते हुए भी बेचैन और अतिसक्रिय होना। ऐसे में, इन्सान जल्दबाजी में कुछ ऐसे वित्तीय फैसले ले सकता है, जिनका उसे बाद में पछतावा होगा। इसका ठीक-ठीक कारण पता नहीं, लेकिन आनुवंशिक और तनाव एवं अनिद्रा जैसी स्थितियां इसमें भूमिका निभाती हैं। ऐसी स्थिति लंबे समय तक चल सकती है, लेकिन सही उपचार-जैसे दवाओं और सही थेरेपी से व्यक्ति सामान्य और सफल जीवन जी सकता है। आपको अपने पति के साथ धैर्य से पेश आना होगा और उन्हें सहारा देना होगा। उन्हें अपने सामने खुलकर बात करने के लिए मनाएं। प्यार का मरहम हर रोग में फायदेमंद होता है। उनसे नाराजगी जताना, उनकी स्थिति के लिए उन्हें कोसना या उन्हें अपने हाल पर छोड़ देना ठीक नहीं होगा। जहां तक संभव हो, उन्हें किसी मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सक से दिखाकर मदद दिलवाएं। यह तय है कि आपके लिए परेशानियां थोड़ी बढ़ गई हैं, लेकिन बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित लोगों के लिए सामान्य जीवन जीना बिल्कुल संभव है।वास्तव में बाइपोलर डिसऑर्डर से पीड़ित लगभग दो-तिहाई लोग उपचार के बाद बेहतर महसूस करते हैं और सामान्य जीवन जीने लगते हैं। जिंदगी की दूसरी पारी बहुत महत्वपूर्ण होती है। हर शुक्रवार इस पर आपको नया पढ़ने को मिलेगा। आप अपने विचार, अनुभव या समस्याएं edit@amarujala.com पर भेज सकते हैं, विशेषज्ञों की मदद से हम कोशिश करेंगे कि संवाद का पुल बन सके।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 02, 2026, 07:47 IST
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