शक्ति की समृद्धि: परिवार के भीतर सोच बदलना लक्ष्य, साक्षी मलिक की अपील- दायरे से बाहर निकलें महिलाएं

ओलंपियन साक्षी मलिक ने महिलाओं को दायरा तोड़कर बाहर निकलने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि सबसे पहला लक्ष्य परिवार के भीतर की सोच को बदलना है। अगर परिवार का सपोर्ट लड़कियों को और बच्चों को मिलता है तो लड़कियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा। साक्षी ने बताया कि उनके बचपन में आस-पास और परिवार में उनके भाई को बेहतर ट्रीटमेंट मिलता था। जबकि उनके लिए व्यवहार अच्छा नहीं था। उसी समय उन्होंने सोचा कि कुछ कर के दिखाना है। इस दौरान क्रिकेट का बोलबाला था और वीरेंद्र सहवाग को देखकर उन्हें प्रेरणा मिली और उन्होंने कुश्ती को अपने व्यवहार में बदल लिया। हालांकि उन्हें बहुत बार बॉडी शेमिंग का सामना करना पड़ा। लड़के और लड़की दोनों ही उनका मजाक उड़ाते थे कि लड़का है या लड़की कुछ पता ही नहीं चलता। लेकिन अब सफलता मिलने के बाद चीजें बदली है। परिवार से लेकर पड़ोसी और रिश्तेदार तक पूछने लगे हैं। सबसे बड़ा असर इलाके के लोगों में आया है। अब अपने बच्चों को लेकर उनकी सोच और व्यवहार बदला है। बुढ़ापे की सुरक्षा के लिए निवेश जरूरी : ममता पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) की कार्यकारी निदेशक ममता रोहित ने महिलाओं को बुढ़ापे में वित्तीय सुरक्षा के लिए निवेश और पेंशन योजनाओं के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि भविष्य के लिए आर्थिक योजना बनाना महिलाओं के लिए ज्यादा जरूरी है। ममता रोहित ने बताया कि नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस) योजना में नौकरी करने वाले और बिना नौकरी वाले दोनों लोग निवेश कर सकते हैं। वर्तमान में महिलाओं की भागीदारी करीब 26% है, जो बढ़ रही है। उन्होंने महिलाओं को अटल पेंशन योजना और एनपीएस जैसी योजनाओं में शामिल होने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि एनपीएस में मात्र 250 रुपये से निवेश शुरू किया जा सकता है और यह दीर्घकालिक पेंशन योजना है।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 09, 2026, 04:45 IST
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