Sakat Chauth 2026: संतान की लंबी उम्र और उज्ज्वल भविष्य के लिए संकष्टी चतुर्थी पर आज करें सात उपाय

Sakat Chauth 2026:आज सकट चौथ है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर एक माह में दो चतुर्थी होती हैं। अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी और पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। नारद पुराण के अनुसार माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के व्रत का बहुत महत्त्व है। इस चतुर्थी को माघी चौथ या तिल चौथ भी कहा जाता है। गणेश जी की कृपा पाने के लिए वैसे तो कोई भी इस व्रत को कर सकता है, लेकिन अधिकांश सुहागिन स्त्रियां ही इस व्रत को परिवार की सुख-समृद्धि के लिए करती हैं। इस दिन भगवान गणपति की आराधना से सुख-सौभाग्य में वृद्धि तथा घर-परिवार पर आ रही विघ्न-बाधाओं से मुक्ति मिलती है। इस दिन श्री गणेशजी की पूजा-अर्चना से रुके हुए मांगलिक कार्य संपन्न होते हैं। माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन चन्द्रमा के दर्शन से गणेश जी के दर्शन का पुण्य फल मिलता है। इस तिथि में गणेश जी की पूजा भालचंद्र नाम से भी की जाती है। 1. संकष्टी चतुर्थी का निर्जल या फलाहार व्रत धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन महिलाएं संतान की दीर्घायु के लिए निर्जल या फलाहार व्रत रखती हैं। माना जाता है कि माता द्वारा किया गया त्याग और संयम संतान के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुरक्षा कवच प्रदान करता है। 2. चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत खोलना संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन के बिना पूर्ण नहीं माना जाता। शास्त्रों में कहा गया है कि चंद्रमा मन का कारक है और गणेश पूजन के साथ चंद्र दर्शन करने से संतान का मानसिक विकास और भावनात्मक संतुलन बना रहता है। Sakat Chauth 2026:सकट चौथ पूजा में शामिल करें ये खास चीजें, संतान की लंबी उम्र का मिलेगा आशीर्वाद 3 भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करना गणेश पुराण के अनुसार भगवान गणेश को दूर्वा अत्यंत प्रिय है। संकष्टी चतुर्थी पर 21 या 108 दूर्वा अर्पित करने से संतान को रोगों से मुक्ति और लंबी आयु का वरदान मिलता है। 4. संतान के नाम से दीपदान इस दिन महिलाएं अपने बच्चे के नाम से घी का दीपक जलाकर भगवान गणेश के समक्ष प्रार्थना करें। पौराणिक मान्यता है कि दीपदान से संतान के जीवन में अज्ञान और नकारात्मकता दूर होती है तथा उन्नति के मार्ग खुलते हैं। Sakat Chauth Vrat Katha 2026:सकट चौथ व्रत में करें इस कथा का पाठ, संतान के सभी विघ्न होंगे दूर 5. गणेश मंत्र या व्रत कथा का पाठ संकष्टी चतुर्थी पर “ॐ गण गणपतये नमः” मंत्र का 108 बार जप या संकष्टी व्रत कथा का पाठ करने से संतान के जीवन से विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं और शिक्षा व करियर में सफलता मिलती है। Sakat Chauth 2026:शुभ योग में सकट चौथ आज, जानें पूजा मुहूर्त और व्रत कथा 6. ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान धार्मिक शास्त्रों के अनुसार दान से पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन बच्चों की भलाई के लिए ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन, वस्त्र या फल दान करने से संतान का भाग्य मजबूत होता है। 7. संतान के लिए मनोकामना और आशीर्वाद पूजन के अंत में महिलाएं भगवान गणेश से अपनी संतान के लिए स्पष्ट मनोकामना करें और उसके सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दें। माना जाता है कि मां का आशीर्वाद और गणेश कृपा मिलकर संतान के जीवन को सुरक्षित और सफल बनाते हैं। डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 06, 2026, 11:50 IST
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