सैफ़ुद्दीन सैफ़: दिलों को तोड़ने वालो तुम्हें किसी से क्या

दिलों को तोड़ने वालो तुम्हें किसी से क्या मिलो तो आँख चुरा लो तुम्हें किसी से क्या हमारी लग़्ज़िश-ए-पा का ख़याल क्यूँ है तुम्हें तुम अपनी चाल सँभालो तुम्हें किसी से क्या चमक के और बढ़ाओ मिरी सियह-बख़्ती किसी के घर के उजालो तुम्हें किसी से क्या नज़र बचा के गुज़र जाओ मेरी तुर्बत से किसी पे ख़ाक न डालो तुम्हें किसी से क्या मुझे ख़ुद अपनी नज़र में बना के बेगाना जहाँ को अपना बना लो तुम्हें किसी से क्या क़रीब-ए-नज़अ' भी क्यूँ चैन ले सके कोई नक़ाब रुख़ से उठा लो तुम्हें किसी से क्या हमारे यूट्यूब चैनल कोSubscribeकरें।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Dec 11, 2025, 12:40 IST
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