साहिर लुधियानवी: दिल की बेचैन उमंगों पे करम फ़रमाओ
पाँव छू लेने दो फूलों को इनायत होगी वर्ना हम को नहीं उन को भी शिकायत होगी आप जो फूल बिछाएँ उन्हें हम ठुकराएँ हम को डर है कि ये तौहीन-ए-मोहब्बत होगी दिल की बेचैन उमंगों पे करम फ़रमाओ इतना रुक रुक के चलोगी तो क़यामत होगी शर्म रोके है उधर शौक़ इधर खींचे है क्या ख़बर थी कभी इस दिल की ये हालत होगी शर्म ग़ैरों से हुआ करती है अपनो से नहीं शर्म हम से भी करोगे तो मुसीबत होगी हमारे यूट्यूब चैनल कोSubscribeकरें।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 07, 2026, 15:32 IST
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