रामायण केवल ग्रंथ नहीं, जीवन जीने की कला सिखाने वाला आदर्श : लखनपाल

पंजयाड़ा में श्रीराम कथा का समापन, जयकारों से गूंजा पंडालसंवाद न्यूज एजेंसीज्वालामुखी (कांगड़ा)। अधवाणी के पंजयाड़ा में आयोजित श्रीराम कथा के अंतिम दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। हजारों की संख्या में पहुंचे भक्तों ने कथा श्रवण कर पुण्य अर्जित किया। कथा व्यास पंडित लखनपाल शर्मा ने अंतिम दिन की कथा में पंचवटी निवास, हनुमान मिलन, सीता हरण, राम सेतु निर्माण, लंका दहन, राम–रावण युद्ध एवं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक के दिव्य प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया।कथा व्यास ने कहा कि रामायण केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाला आदर्श है। रामायण हमें सेवा भाव, त्याग, बलिदान और दूसरों की संपत्ति पर अधिकार न रखने की प्रेरणा देता है। भगवान श्रीराम ने दीन-दुखियों और वनवासियों के कष्ट दूर कर उन्हें संगठित किया और संगठन शक्ति के माध्यम से समाज में व्याप्त बुराइयों का नाश किया। प्रत्येक राम भक्त का दायित्व है कि वह पुनीत और लोक कल्याणकारी कार्यों में अपना सहयोग दे। भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक का मार्मिक वर्णन और राम दरबार की आकर्षक झांकी के दर्शन पर पूरा कथा पंडाल राजा रामचंद्र की जय के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भक्ति रस में डूब गए। कथा के समापन पर रामायण पूजन और आरती का आयोजन किया गया, जिसके उपरांत श्रद्धालुओं के बीच महा भंडारे का वितरण किया गया।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Dec 14, 2025, 18:09 IST
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