राकेश धर द्विवेदी: सखि मोरे नैना बरसत जाए
सखि री, मोरे नैना बरसत जाए, राज छुपे जो इन अंखियन में अधरों पर ना ला पाए सखि मोरे नैना बरसत जाए। निसि दिन याद करूं मैं पिया की फिर भी पिया ना आए, कौन सुनेगा इस विरहन की जिसको न चैना आए सखि री, मोरे नैना बरसत जाए। पिया मिलन की आस में सुध-बुध खो बैठी मैं, बीत गई सारी रैना हाल सुनाऊं मैं किस विरहन की, मोसे अब कहा न जाए सखि री, मोरे नैना बरसत जाए। हमारे यूट्यूब चैनल कोSubscribeकरें।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 15, 2026, 18:00 IST
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