PSU Bank Q3 Results: सरकारी बैंकों का मुनाफा 18% बढ़कर 52603 रुपये करोड़ हुआ, एसबीआई की बादशाहत फिर बरकरार

देश के सरकारी बैंकों (पीएसबी) ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्तूबर-दिसंबर) में शानदार प्रदर्शन करते हुए मुनाफे के नए रिकॉर्ड बनाए हैं। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की अगुवाई में सभी 12 सरकारी बैंकों का कुल मुनाफा सालाना आधार पर 18% बढ़कर 52,603 करोड़ रुपये हो गया है। यह आंकड़ा भारतीय बैंकिंग सेक्टर की मजबूती और वित्तीय सुधारों के असर को दर्शाता है। एसबीआई का रहा एकतरफा दबदबा स्टॉक एक्सचेंजों पर जारी आंकड़ों के मुताबिक, 52,603 करोड़ रुपये के कुल मुनाफे में अकेले SBI की हिस्सेदारी 40% रही है। देश के सबसे बड़े ऋणदाता SBI ने इस तिमाही में 21,028 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 24% अधिक है। किस बैंक ने कितनी ग्रोथ की प्रतिशत के लिहाज से मुनाफे में वृद्धि के मामले में छोटे और मझोले सरकारी बैंकों ने बाजी मारी है। इंडियन ओवरसीज बैंक (आईओबी): सबसे ज्यादा 56% की वृद्धि के साथ 1,365 करोड़ रुपये का मुनाफा। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया: 32% की बढ़ोतरी के साथ 1263 करोड़ रुपये का मुनाफा। बैंक ऑफ महाराष्ट्र: मुनाफे में 27% का इजाफा। केनरा बैंक: 26% की वृद्धि। इसके अलावा, पंजाब एंड सिंध बैंक ने 19%, यूको बैंक ने 16% और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने 13% की डबल डिजिट ग्रोथ दर्ज की है। हालांकि, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक और बैंक ऑफ इंडिया की मुनाफे की रफ्तार धीमी रही और उन्होंने सिंगल डिजिट ग्रोथ दर्ज की। नौ महीने में 1.46 लाख करोड़ रुपये की कमाई चालू वित्त वर्ष के पहले 9 महीनों (अप्रैल-दिसंबर 2025) में सरकारी बैंकों का प्रदर्शन ऐतिहासिक रहा है। इस अवधि में बैंकों का कुल मुनाफा पहली बार 1.45 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया। कुल मिलाकर, PSBs ने 1,46,277 करोड़ रुपये कमाए हैं, जो पिछले साल की इसी अवधि (1,29,994 करोड़ रुपये) के मुकाबले करीब 13% ज्यादा है। दो लाख करोड़ के पार जाएगा मुनाफा वित्तीय सेवा सचिव एम नागराजू ने एक इंटरव्यू में विश्वास जताया है कि मौजूदा वित्त वर्ष में सरकारी बैंकों का कुल मुनाफा 2 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर को पार कर जाएगा। उन्होंने कहा, "भारतीय बैंकिंग क्षेत्र अच्छी स्थिति में है। इस साल क्रेडिट ग्रोथ 12% है जो बहुत अच्छी है, और डिपॉजिट ग्रोथ भी 10% के स्तर पर संतोषजनक है"। नागराजू ने यह भी स्पष्ट किया कि आरबीआई के कड़े और विवेकपूर्ण प्रबंधन के कारण बाहरी वैश्विक कारकों का भारतीय बैंकिंग सेक्टर पर ज्यादा नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। पिछली तिमाहियों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पहली तिमाही में 11% और दूसरी तिमाही में 9% की वृद्धि के बाद, तीसरी तिमाही में 18% की छलांग यह बताती है कि सरकारी बैंकों की बैलेंस शीट अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और लचीली है।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 09, 2026, 18:52 IST
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