खंडित जनादेश के बाद केकड़ी में बड़ा सियासी ड्रामा: आरएलपी बनी किंगमेकर, क्या 2021 की तरह होगी क्रॉस वोटिंग?

केकड़ी में चेयरमैन की कुर्सी पर आरूढ़ होने के लिए दोनों ही दलों की ओर से मशक्कत जोरों पर है। दोनों ही दलों द्वारा बोर्ड बनाने के दावे किए गए हैं। फिलहाल जीते हुए सभी पार्षद अंडरग्राउंड हैं, मगर दिलचस्प चर्चा यह है कि अब कांग्रेस और भाजपा के नेताओं द्वारा अपने-अपने स्तर पर एक-दूसरे के पार्षदों के परिवारों से संपर्क कर उनका समर्थन हासिल करने की जुगत लगाई जा रही है। ऐसे में कल होने वाले अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर राजनीतिक जानकार क्रॉस वोटिंग होने का अंदेशा भी जता रहे हैं। 21वें वोट को लेकर जोरदार हलचल दोनों ही दलों में पार्षदों की बाड़ेबंदी के बीच 21वें वोट को लेकर जोरदार हलचल मची हुई है और केकड़ी नगर पालिका अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर सियासी गणित पर छाई धुंध बरकरार है। नतीजों के बाद कुल 40 वार्डों में से कांग्रेस 20, भाजपा 18 और आरएलपी 2 पार्षदों के साथ खड़ी है। बहुमत के लिए 21 वोट जरूरी हैं। ऐसे में अब पूरा सियासी खेल उस एक वोट के इर्द-गिर्द घूम रहा है, जो किसी भी खेमे को बहुमत के आंकड़े तक पहुंचा सकता है। कांग्रेस को एक और भाजपा को तीन वोट की दरकार अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस ने अनिल मित्तल और भाजपा ने विनीत चोरड़िया को प्रत्याशी बनाया है। दोनों ही खेमों के सामने अपने-अपने संख्या बल को 21 तक पहुंचाने की चुनौती है। कांग्रेस के पास 20 पार्षद हैं, इसलिए उसे सिर्फ एक अतिरिक्त वोट की जरूरत है। वहीं भाजपा के पास 18 पार्षद हैं और उसे बहुमत के लिए तीन वोट जुटाने होंगे। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस और भाजपा दोनों ने अब अपने-अपने स्तर पर पार्षदों के परिवारों से संपर्क और सांठ-गांठ करने की कवायद शुरू कर दी है। पार्षदों की बाड़ेबंदी के बीच राजनीतिक दलों के सिपहसालारों द्वारा येन-केन-प्रकारेण पार्षदों के परिवारों तक पहुंचकर समर्थन हासिल करने की इस कवायद को लेकर शहर में व्यापक चर्चा है। हालांकि इस तरह की कवायद खुफिया ढंग से चल रही है और पर्देदारी के चलते इन संपर्कों और बातचीत की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। मगर इन चर्चाओं ने अध्यक्ष के चुनाव में क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं को जन्म दे दिया है। 21वें वोट का तिलिस्म पार्षदों की बाड़ेबंदी के बाद दोनों प्रमुख राजनीतिक खेमे अपने-अपने पार्षदों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटे हैं। राजनीतिक गलियारों में पार्षदों के संपर्क, मुलाकातों और संभावित समर्थन को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि अभी तक किसी भी खेमे की ओर से यह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है कि उसे 21वां वोट कहां से मिलेगा। दो पार्षद जीतकर किंगमेकर की भूमिका में आई राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने भी अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है, मगर बाड़ेबंदी से निकलकर सामने आ रही तस्वीरों में आरएलपी के पार्षद राजेंद्र चौधरी, कांग्रेस प्रत्याशी अनिल मित्तल के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। नामांकन के दौरान भी चौधरी की मित्तल के साथ मौजूदगी चर्चा में रही थी। ऐसे में मौजूदा राजनीतिक तस्वीर को देखें तो कांग्रेस के 20 और राजेंद्र चौधरी के साथ आने पर 21 का आंकड़ा बनता दिखाई दे रहा है। ये भी पढ़ें-अजमेर में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत: माता-पिता और बेटी ने की सामूहिक आत्महत्या, जांच में जुटी पुलिस समर्थन की आस में पार्षदों के घर तक गुहार अब क्षेत्र में चर्चाएं हैं कि जोड़-तोड़ के लिए सियासी संपर्क केवल पार्षदों तक सीमित नहीं रह गए हैं। राजनीतिक रणनीतिकारों द्वारा पार्षदों के परिवारों तक पहुंचने की कोशिशें की जा रही हैं। इसके पीछे का उद्देश्य समर्थन को लेकर स्थिति स्पष्ट करना और अंतिम समय में किसी भी तरह के राजनीतिक बदलाव को अपने पक्ष में करना है। तरह-तरह की इन चर्चाओं के बीच लब्बोलुआब यह है कि अध्यक्ष पद का वास्तविक फैसला 21 सितंबर को होने वाले मतदान में ही सामने आएगा। जहां कांग्रेस 20, भाजपा 18 व आरएलपी 2 सीटों पर है और बहुमत का जादुई आंकड़ा 21 है। ऐसे में अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि किसके पास कितने पार्षद हैं। असली सवाल यह है कि 21 सितंबर को मतदान के समय 21वां वोट किस खेमे के खाते में जाएगा 2021 के चुनाव में भी हुई क्रॉस वोटिंग केकड़ी की राजनीतिक चर्चाओं में 2021 का अध्यक्ष चुनाव भी एक बार फिर याद किया जा रहा है। उस समय कांग्रेस के 21, भाजपा के 17 और निर्दलीयों के 2 पार्षद चुने गए थे। अध्यक्ष के चुनाव में कांग्रेस के कमलेश कुमार साहू को 24 वोट मिले थे। उस समय भी क्रॉस वोटिंग की चर्चा जोरों पर हुई थी। इस बार भी फर्क सिर्फ आंकड़ों का नहीं है। इस बार किसी भी दल के पास अपने दम पर बहुमत नहीं है और इसलिए हर एक वोट महत्वपूर्ण हो गया है। मित्तल के पार्टी बदलने से शुरू हुआ था चुनावी रण चुनाव से ठीक पहले पूर्व पालिका अध्यक्ष अनिल मित्तल भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए और उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर वार्ड 25 से चुनाव लड़ा और 294 मतों से जीत दर्ज की। उन्होंने कांग्रेस की ओर से पूरे चुनाव की कमान संभाली। इस दौरान कांग्रेस के पूर्व कैबिनेट मंत्री रघु शर्मा भी सक्रिय रहे, जबकि भाजपा की ओर से क्षेत्रीय विधायक शत्रुघ्न गौतम ने मोर्चा संभाला। भाजपा की ओर से विनीत चोरड़िया को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया गया। विनीत चोरड़िया ने पहली बार राजनीति में कदम रखा और वे वार्ड 37 से चुनाव लड़कर 73 वोटों से जीते। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों खेमों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी खूब हुए। विकास, जिला बहाली और नगर पालिका के कामकाज से लेकर स्थानीय नेतृत्व तक कई मुद्दे चुनावी सभाओं में उठे। केकड़ी के मतदाताओं ने तो अपना जनादेश दे दिया, लेकिन अध्यक्ष पद का मतदान अभी बाकी है। केकड़ी नगर पालिका के अध्यक्ष पद की कुर्सी के लिए सियासी चक्रव्यूह अब अंतिम दौर में है। बाड़ेबंदी के बीच पार्षदों से लेकर उनके परिवारजनों से संपर्क करने की चर्चाओं ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।

#CityStates #Ajmer #Rajasthan #KekriNagarPalikaElection #KekriChairmanElection #KekriMunicipalElection #AnilMittal #VineetChordiya #CongressBjpKekri #RlpKekri #KekriChairmanElection2026 #CrossVotingKekri #RajasthanLocalBodyElection #VaranasiLiveNews

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Sep 20, 2026, 07:07 IST
पूरी ख़बर पढ़ें »




खंडित जनादेश के बाद केकड़ी में बड़ा सियासी ड्रामा: आरएलपी बनी किंगमेकर, क्या 2021 की तरह होगी क्रॉस वोटिंग? #CityStates #Ajmer #Rajasthan #KekriNagarPalikaElection #KekriChairmanElection #KekriMunicipalElection #AnilMittal #VineetChordiya #CongressBjpKekri #RlpKekri #KekriChairmanElection2026 #CrossVotingKekri #RajasthanLocalBodyElection #VaranasiLiveNews