Kurukshetra News: कभी गरीबी से निजात पाने के लिए चलाया रिक्शा, अब करोड़ों का वार्षिक टर्नओवर

लाडवा। गांव दामला के किसान धर्मबीर कांबोज ने कभी घर की लाचारी व गरीबी से निजात पाने के लिए दिल्ली में रिक्शा तक चलाई। आज उनका सफल उद्यमी के तौर पर करोड़ों रुपये का वार्षिक टर्न ओवर है। अनाजमंडी में लगे प्रदेश स्तरीय कृषि मेले में प्रगतिशील किसानों में उन्हें सबसे पहला पुरस्कार मिला है, जिसके साथ ही वे फिर चर्चा में आ गए हैं। वे बताते हैं कि छह महीने बाद दिल्ली में एक दुर्घटना के बाद हरियाणा में अपने पैतृक गांव दामला लौट आए थे। वे बागवानी विभाग यमुनानगर से जुड़ गए। आज वे हर किसान के लिए प्रेरणा स्त्रोत बने हुए हैं। आज भी सैंकड़ों लोगों को रोजगार दिए हुए हैं तो वहीं हजारों लोगों को प्रशिक्षण भी दे चुके हैं।रिक्शा चालक से सफल आविष्कारक बने धर्मबीर कांबोज का जन्म 1963 में हुआ था। वे पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे थे और सिर्फ मैट्रिक तक ही पढ़ाई की। किशोरावस्था के शुरुआती दौर में ही उसे परिवार का आर्थिक सहयोग देने के लिए पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। आज वे अपनी पेटेंट वाली मशीनें 20 देशों में बेचते हैं और सालाना लाखों रुपये कमाते हैं। धर्मवीर की कहानी असाधारण है, जो गरीबी से अमीरी तक के सफर को दर्शाती है। वे बहुउद्देशीय प्रसंस्करण मशीन के लिए सबसे अधिक जाने जाते हैं, जो किसानों को विभिन्न प्रकार के कृषि उत्पादों को छोटे पैमाने पर संसाधित करने की सुविधा देती है। वे बताते हैं कि अपने खाली समय में, वह ब्रोकली, शतावरी, सलाद पत्ता और शिमला मिर्च जैसी विदेशी फसलों की खेती से संबंधित विषयों पर पढ़ते थे। 2004 में, हरियाणा बागवानी विभाग की ओर से उन्हें राजस्थान जाने का अवसर दिया गया। इसदौरान एलोवेरा की फसल और औषधीय गुणों वाले उत्पादों को प्राप्त करने के लिए इसके अर्क के बारे में जानकारी प्राप्त की। 2002 में उनकी मुलाकात एक बैंक प्रबंधक से हुई, जिन्होंने उन्हें खाद्य प्रसंस्करण के लिए आवश्यक मशीनों के बारे में जानकारी दी, लेकिन मशीनों की कीमत पांच लाख रुपये बताई। बॉक्सयह है मशीन की खासियतकांबोज की बहुउद्देशीय मशीन एक पोर्टेबल मशीन है जिसमें सिंगल-फेज मोटर लगी है और यह विभिन्न प्रकार के फलों, जड़ी-बूटियों और बीजों को संशोधित कर सकती है। यह तापमान नियंत्रण और ऑटो-कटऑफ सुविधा के साथ एक बड़े प्रेशर कुकर के रूप में भी काम करती है। इस मशीन की क्षमता 400 लीटर है। एक घंटे में यह 200 लीटर एलोवेरा संशोधित कर सकती है। मशीन हल्की और पोर्टेबल है, और यह एक ही मोटर से चलती है। यह अपनी तरह की अनूठी मशीन है जो पीसने, मिलाने, भाप में पकाने, प्रेशर कुकिंग करने और रस, तेल या जेल निकालने का काम स्वयं कर सकती है। राष्ट्रीय नवाचार फाउंडेशन ने भी उन्हें इस मशीन के लिए पेटेंट प्रदान किया है। इन मशीनों को संयुक्त राज्य अमेरिका, इटली,नेपाल,ऑस्ट्रेलिया, केन्या, नाइजीरिया, जिम्बाब्वे इथियोपिया और युगांडा सहित 20 देशों में बेचा जाता है।बॉक्स2013 में राष्ट्रपति से हो चुके सम्मानित2009 में नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन-इंडिया (एनआईएफ) ने अपने पांचवें राष्ट्रीय द्विवार्षिक पुरस्कार समारोह में बहुउद्देशीय प्रसंस्करण मशीन के उनके आविष्कार के लिए उन्हें हरियाणा राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया। 2013 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 02, 2026, 02:58 IST
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