High Court : केस डायरी या चार्जशीट नहीं, मुकदमे के दौरान प्रस्तुत सबूतों के आधार पर ही बना सकते हैं नया आरोपी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मुकदमे के दौरान प्रस्तुत किए गए सबूतों के आधार पर ही नया आरोपी बनाने के लिए किसी को सीआरपीसी की धारा-319 के तहत तलब किया जा सकता है, आरोप पत्र या केस डायरी के आधार पर नहीं। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति चवन प्रकाश की एकल पीठ ने दहेज हत्या में देवर व सास-ससुर को आरोपी बनाने की मांग में दायर पुनरीक्षण अर्जी खारिज कर दी। कौशाम्बी के मोहब्बतपुर पइंसा थाना क्षेत्र निवासी राधिका की शादी के पांच साल बाद सात जनवरी 2020 को संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। पिता मान सिंह ने आरोप लगाया था कि दामाद मनोज, ससुर भैया लाल, सास और देवर अशोक कुमार ने भैंस व सोने की अंगूठी की मांग को लेकर बेटी की हत्या कर दी। हालांकि, पुलिस जांच के बाद केवल पति के खिलाफ ही आरोप पत्र दाखिल किया गया था। ट्रायल के दौरान जब गवाहों के बयान दर्ज किए गए तो वादी ने धारा-319 के तहत आवेदन देकर ससुराल के अन्य लोगों को भी आरोपी बनाने की मांग की थी। ट्रायल कोर्ट ने आठ नवंबर 2024 को आवेदन खारिज कर दिया तो मान सिंह ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। उनके अधिवक्ता ने दलील दी कि मृतका के पिता और अन्य गवाहों ने अदालत में दिए बयानों में ससुरालवालों की भूमिका बताई है। जब गवाहों ने अभियोजन पक्ष का समर्थन किया है तो प्रथम दृष्टया मामला बनता है। ऐसे में ट्रायल कोर्ट को समन करना चाहिए था। इस पर सास-ससुर व देवर के वकील ने दलील दी कि शादी के बाद से विवाहिता पति संग अलग रह रही थी। दहेज की कोई मांग उन्होंने नहीं की। जांच अधिकारी ने 19 गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद पाया था कि अपराध में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि गवाहों के बयानों में विरोधाभास है। जिरह के दौरान यह साफ हुआ कि दहेज की मांग केवल पति मनोज ने ही की थी। हाईकोर्ट ने कहा कि धारा-319 के तहत किसी को आरोपी बनाने के लिए प्रथम दृष्टया मामले से कहीं अधिक पुख्ता सबूतों की जरूरत होती है। ट्रायल कोर्ट का आदेश तर्कसंगत है। क्योंकि, गवाहों के बयानों व डॉक्टर की रिपोर्ट के अनुसार आरोपियों की संलिप्तता के पर्याप्त आधार नहीं मिले।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 10, 2026, 17:52 IST
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