नारी सम्मान से ही राष्ट्र की उन्नति संभव : साध्वी
धर्मशाला। जिस राष्ट्र में नारी का सम्मान नहीं होता, वह कभी उन्नति के शिखरों को प्राप्त नहीं कर सकता। हमारे देश के वर्तमान पतन का एक मुख्य कारण यह भी है कि हमने शक्ति की इन सजीव प्रतिमाओं के प्रति आदर की भावना को भुला दिया है। यह बात साध्वी मनस्विनी भारती ने दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से बगली में श्री शिव कथा में कही। उन्होंने कहा कि संस्कारी संतान ही माता-पिता का नाम रोशन करती है, इसलिए पुत्र-पुत्री का भेद त्याग कर बेटियों को प्रेम और संस्कारों से पोषित करना अनिवार्य है। कथा के तीसरे दिन साध्वी ने माता पार्वती के जन्म का प्रसंग विस्तार से सुनाया। उन्होंने बताया कि माता सती ने देह त्यागने से पूर्व भगवान शिव के चरणों में प्रार्थना की थी कि वह अगले जन्म में भी उन्हें ही पति रूप में प्राप्त करें। इसी संकल्प के साथ उन्होंने हिमालय राज और माता मैना के यहां पुत्री रूप में जन्म लिया, जिससे पूरा हिमालय क्षेत्र खुशियों से सराबोर हो गया।साध्वी ने समाज में बढ़ती कन्या भ्रूण हत्या जैसी बुराई पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि एक ओर हम नवरात्रों में कन्याओं की पूजा करते हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें जन्म लेने से पहले ही गर्भ में दफन कर दिया जाता है। उन्होंने मनुस्मृति का उदाहरण देते हुए कहा कि यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता, अर्थात जहां नारियों की पूजा होती है, वहीं देवताओं का निवास होता है।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 06, 2026, 20:19 IST
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