काशी में मिथिलेशनंदिनी शरण: बोले- आधुनिक होने का अर्थ परंपराओं का विनाश नहीं, उन्हें लेकर चलना होगा; दी सीख

Varanasi News: महामना महोत्सव पखवाड़े के समापन पर बीएचयू में अयोध्या से आए महाराज मिथिलेशनंदिनी शरण ने कहा कि आदर्श यह नहीं बताता कि क्या हो, बल्कि यह बताता है कि हम वास्तव में कैसे हैं। आदर्श दर्पण का पर्याय है। इसमें हम स्वयं को देखते हैं। इसी तरह महामना मालवीय के चरित्र को समझकर हमें अपने अंदर सकारात्मक बदलाव लाने होंगे। स्वतंत्रता भवन में बृहस्पतिवार को मिथिलेशनंदिनी शरण ने कहा कि साधनहीनता और कई बाधाओं के बावजूद महामना ने महासेतु के जैसे बीएचयू को स्थापित किया। आधुनिक होने का अर्थ परंपराओं का विनाश नहीं, बल्कि उन्हें आत्मसात करते हुए आगे बढ़ना है। विश्वास की एकता और चरित्र-बल का समन्वय कर ही सशक्त राष्ट्र बनाया जा सकता है। स्वराज, स्वदेशी और स्वशिक्षा महामना मालवीय के चिंतन के मूल आधार थे, जो आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। सेवाज्ञ संस्थानम की ओर से ये कार्यक्रम 10 से ज्यादा दिनों तक आयोजित किया गया। बृहस्पतिवार को पुरस्कार वितरण समारोह में विद्वानों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं ने हिस्सेदारी की। संस्थान के राष्ट्रीय सचिव माधव झा ने युवा धर्म संसद और उतिष्ठ भारत कार्यक्रम जैसी पहल की भी जानकारी दी। हिंदी साहित्यकार प्रो. अवधेश प्रधान ने महामना कई भाषाओं के जानकार थे और मानसिक शिक्षा के साथ-साथ शारीरिक सौष्ठव पर भी विशेष बल देते थे।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 08, 2026, 23:26 IST
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