बड़ी साजिश नाकाम: आनंद विहार-सिविल लाइंस में हमले की थी तैयारी, पाकिस्तान से वीडियो कॉल पर मिल रहे थे निर्देश

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की जांच में सामने आया है कि राष्ट्रीय राजधानी में पेट्रोल बम से आतंकी हमले की साजिश रच रहे आरोपी पाकिस्तान में बैठे अपने हैंडलरों से वीडियो कॉल के जरिए अंतिम निर्देश लेने वाले थे। योजना के मुताबिक, आरोपी दिल्ली के आनंद विहार और सिविल लाइंस इलाके में तय स्थानों पर पहुंचने के बाद वीडियो कॉल करते, ताकि हैंडलर मौके की स्थिति देखकर हमला कब और कैसे करना है, इसका अंतिम निर्देश दे सकें। बहरहाल हमले से पहले ही स्पेशल सेल ने आरोपियों को दबोचकर साजिश नाकाम कर दी। जांच अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी दानिश उर्फ चांद मियां और सलमान ने यूट्यूब वीडियो देखकर पेट्रोल बम बनाना सीखा था। दोनों ने अपने खेत में पेट्रोल बम तैयार किए और उन्हें लेकर दिल्ली पहुंचे। शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि उन्हें पुलिस प्रतिष्ठानों और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों को निशाना बनाने के निर्देश मिले थे। सूत्रों के मुताबिक, हैंडलरों ने दोनों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि लक्ष्य स्थल पर पहुंचने के बाद ही वीडियो कॉल शुरू करें। कॉल के दौरान पाकिस्तान में बैठे संचालक आसपास की सुरक्षा व्यवस्था, पुलिस की मौजूदगी और भीड़भाड़ का आकलन करते। इसके बाद मौके की परिस्थितियों के अनुसार हमले का अंतिम आदेश दिया जाना था। इससे संकेत मिलता है कि पूरी साजिश रियल-टाइम मॉनिटरिंग के आधार पर संचालित की जा रही थी। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी सोशल मीडिया के माध्यम से पाकिस्तान स्थित हैंडलरों के संपर्क में आए थे। उनके मोबाइल फोन से अंतरराष्ट्रीय संचार के लिए इस्तेमाल होने वाले डिजिटल माध्यमों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मिले हैं। जांच एजेंसियां इनकी फॉरेंसिक जांच करा रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। स्पेशल सेल का मानना है कि इस नेटवर्क का उद्देश्य दिल्ली में ऐसी वारदात को अंजाम देना था, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक दहशत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रचार मिल सके। जांच एजेंसियां अब पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों, उनके भारतीय संपर्कों और आर्थिक मदद के पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं। किसको क्या काम मिला था दानिश उर्फ चांद मियां : दानिश अप्रैल 2026 में सोशल मीडिया के जरिये राणा हुनैन के संपर्क में आया था। उसे दिल्ली में किसी महत्वपूर्ण स्थान या पुलिस प्रतिष्ठान की रेकी और निशाना बनाने का काम सौंपा गया था। बदले में 20,000 रुपये देने का वादा किया गया था। सलमान : दानिश का दोस्त है। वह दानिश के साथ दिल्ली आया था। प्रस्तावित हमले का वीडियो बनाने का निर्देश सलमान को ही दिया गया था। इस काम के लिए उसे भी 20,000 रुपये देने का वादा किया गया था। तैयब : तैयब सोशल मीडिया के माध्यम से हसन गुर्जर के संपर्क में आया था। हसन के निर्देश पर उसने जुबैर खान को अमृतसर भेजा, जहां से उसे मलकीत सिंह के पास से आधुनिक हथियार और गोला-बारूद की खेप प्राप्त करनी थी। बाद में तैयब ने यह खेप अपने साले अली फजल को सौंप दी। जुबैर खान : तैयब का साथी है। तैयब के कहने पर वह अमृतसर गया, जहां उसने मलकीत सिंह से आधुनिक पिस्तौल और कारतूस की खेप प्राप्त की। अमृतसर में वह मलकीत सिंह के घर पर एक रात भी रुका था। अली फजल : तैयब का साला है। तैयब ने उसे पाकिस्तान से आई हथियारों की खेप दिल्ली या यूपी में किसी खरीदार को बेचने की जिम्मेदारी दी थी। वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश पुलिस ने अली फजल के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था। मलकीत सिंह : इसी ने ड्रोन के माध्यम से सीमा पार से भेजी गई हथियारों की खेप हसन गुर्जर से प्राप्त की थी। बाद में उसने यही खेप जुबैर खान को सौंप दी।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jul 07, 2026, 02:14 IST
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