Kuttey Review: पीएम मोदी के नोटबंदी भाषण पर लॉजिक का उठा सवाल, बेटे की फिल्म पर पिता का विशाल साया

पिता नेकमीनेबनाई तो बेटाकुत्तेही बनाएगा। गुलजार से पारिवारिक रिश्ता है तो गाने वह लिखेंगे ही। क्या लिख रहे हैं, ऐसा क्यों लिख रहे हैं, इसके लिए वह उन लोगों को जिम्मेदार बताते हैं जिनके लिए वहपूज्यरहे हैं,लेकिन खुद गुलजार के शब्दों मेंचश्म ए बद दूरका मतलब ये नहीं समझते। आसमान को नजर न लगे लेकिन उनकी पहली फिल्मकुत्तेका पहला सीन जिस तरह से उन्होंने शूट किया है, वह उनकी मौलिकता का प्रमाण है। अपने पिता, मां और दानाजी (गुलजार) के आभामंडल से बाहर रहकर वह फिल्में बनाएंगे तो दूर तक जाएंगे। लेकिन, इन दिग्गजों की अपने पाठकों, दर्शकों और श्रोताओं के बारे में सीमित समझ के भ्रमजाल में फंसे रहे तो उनकी आगे की राह मुश्किल है। फिल्मकुत्तेका पहला सीन छोड़कर आखिर तक ये फिल्म विशाल भारद्वाज का ही सिनेमा लगती है। क्लाइमेक्स पर आकर नोटबंदी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण पर की गई फिल्म के नायक की टिप्पणी बहुत ही आपत्तिजनक है। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड की तरफ से फिल्म देखने वालों को ये समझ में भी आई होगी, लगता नहीं है।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 13, 2023, 11:27 IST
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