खबरों के खिलाड़ी: वंदे मातरम, चुनाव सुधार पर चर्चा में किसने क्या पाया; विश्लेषकों ने बताया सधे कौन से निशाने
संसद का शीतकालीन सत्र जारी है। बीते हफ्ते संसद में दो विषयों पर चर्चा हुई। पहला वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर और दूसरी चर्चा चुनाव सुधार को लेकर हुई। दोनों सदनों में हुई इस चर्चा में हर पक्ष ने अपनी बात रखी। इस चर्चा के जरिए किस दल ने क्या साधा किसने कहां बढ़त बनाई इस चर्चा के कौन से सकारात्मक पहलू सामने आए इन्हीं सवालों पर इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, समीर चौगांवकर, राकेश शुक्ल, पूर्णिमा त्रिपाठी मौजूद रहे। पूर्णिमा त्रिपाठी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हीं फैक्ट को कोट करते हैं जो उन्हें सूट करते हैं। जिन्ना की आपत्ति की बात तो उन्होंने की, लेकिन ये नहीं बताया कि वंदेमातरम पहली बार कब और कहां गाया गया था। जिन्ना की आपत्ति के बहाने सत्ताधारी पार्टी को नेहरू की आलोचना करने का मौका जरूर मिल जाता है। बंगाल का चुनाव सामने हैं, वहां इस गीत का बहुत महत्व है। इस मुद्दे के जरिए प्रधानमंत्री ने वहां के मतदाताओं को भी संदेश दिया। रामकृपाल सिंह: ये इस सत्र का सबसे सकारात्मक पहलू है, जब दोनों पक्ष चर्चा के लिए सहमत हुए। दोनों पक्ष इन दोनों विषयों पर चर्चा के लिए साथ आए। इसके बाद यह पहली बार ऐसा है जब राहुल गांधी ने कहा कि प्रदूषण पर हम बात करेंगे। इसके लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष साथ आने की बात कर रहे हैं। ये बहुत अच्छा संकेत है कि आप इतिहास को बहुत ज्यादा कुरेदने की जगह वर्तमान चुनौतियों की बात करें और भविष्य के लिए योजनाएं बनाएं। राकेश शुक्ल: राहुल और प्रियंका दोनों की तुलना की जाए तो मुझे लगता है कि बहन प्रियंका ज्यादा बेहतर रहीं। राहुल गांधी जी का प्रस्तुतिकरण मुझे बहुत ज्यादा प्रभावी नहीं लगा। कहीं न कहीं राहुल गांधी ने एक बेहतर मंच और अवसर को उतने बेहतर तरीके से नहीं भुना पाए। प्रियंका गांधी ने एक अच्छे वकील के रूप में अपनी पार्टी का पक्ष रखा। समीर चौगांवकर: केंद्र सरकार ने यह तय कर लिया था कि वंदेमातरम पर चर्चा होगी। देखिए आजादी के पहले जो भी अच्छा या बुरा है वो कांग्रेस के साथ जुड़ेगा ही। क्योंकि उस वक्त भाजपा नहीं थी। ये भी तय है कि उस वक्त जो बुरा हुआ उसे भाजपा उठाएगी ही। कांग्रेस को यह देखना होगा कि उस वक्त का जो अच्छा है उसे वो मजबूत तरीके से उठाए। राहुल गांधी को जो स्पेस मिला था। राहुल विपक्ष के नेता हैं। एसआईआर आपका सबसे बड़ा मुद्दा था। मुझे लगता है कि वो अपने ही सबसे बड़े मुद्दे पर चूक गए। प्रियंका का भाषण जरूर इस मामले में बेहतर रहा। विनोद अग्निहोत्री: मुझे लगता है कि प्रियंका गांधी ने वंदे मातरम के मुद्दे पर बहुत बेहतर तरीके से तथ्य रखे। गौरव गोगोई ने भी इस मुद्दे पर बहुत बेहतर तरीके से तथ्य रखे। ये रणनीति के तहत तय था कि राहुल एसआईआर पर बोलेंगे और प्रियंका वंदे मातरम पर बोलेंगी। दूसरा यह भी तय था कि प्रियंका हिंदी में बोलेंगी और राहुल अंग्रेजी में बोलेंगे। मुझे लगता है कि चुनाव सुधार के मुद्दे पर सबसे अच्छा भाषण मनीषतिवारीनेदिया।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Dec 13, 2025, 11:50 IST
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