Keshav Maurya VS Akhilesh Yadav : 2027 से पहले होगा बड़ा खेला, केशव प्रसाद मौर्य के दावे से हड़कंप!
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, "हमारा एक ही लक्ष्य है कि 2027 में समाजवादी पार्टी का सूपड़ा साफ करना है.अखिलेश यादव बिहार चुनाव हारने के बाद घबराए हुए हैं और तीसरी बार प्रदेश में भाजपा सरकार आने का उनके अंदर, उनकी पार्टी के विधायकों, नेताओं के अंदर अभी से खौफ है" पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान पर उन्होंने कहा, "यह दुष्प्रचार करने वाली कांग्रेस एंड कंपनी, चाहे TMC हो, समाजवादी पार्टी हो, DMK हो, जिनका नाम(SIR में) कटा है, ड्राफ्ट सूची आने के बाद उन्हें नाम जोड़वाने का मौका दिया जाता है TMC क्योंकि पश्चिम बंगाल से जा रही है, वहां भाजपा आ रही है इसलिए बौखला गई है उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने हाल ही में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा हमला बोला है। उनके बयानों का मुख्य केंद्र यह है कि भाजपा 2027 में 2017 से भी बड़ी जीत दर्ज करेगी और विपक्षी दलों का अस्तित्व सीमित कर देगी। केशव प्रसाद मौर्य ने हाल के दौरों (सहारनपुर और बरेली सहित) के दौरान सार्वजनिक मंचों से यह दावा किया कि 2027 में समाजवादी पार्टी का "सूपड़ा साफ" हो जाएगा। उनका कहना है कि जनता सपा की "गुंडागर्दी, अपराध और माफियाओं के संरक्षण" की राजनीति को पूरी तरह नकार देगी। उन्होंने दावा किया कि भाजपा कार्यकर्ताओं के परिश्रम और जनता के आशीर्वाद से 2017 के रिकॉर्ड से भी अधिक सीटें जीतकर तीसरी बार सरकार बनाएगी। मौर्य ने कहा कि भाजपा मतदाता सूची को पूरी तरह पारदर्शी और शुद्ध बनाने के पक्ष में है। उनका मानना है कि अगर मतदाता सूची सही हो जाए, तो सपा और कांग्रेस का खाता खुलना भी मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने सपा को "डूबता हुआ जहाज" बताते हुए तंज कसा कि समाजवादी पार्टी अब "समाप्तवादी पार्टी" बनने की ओर अग्रसर है। अखिलेश यादव के 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नारे पर पलटवार करते हुए मौर्य ने इसे "परिवार डेवलपमेंट एजेंसी" करार दिया। उन्होंने कहा कि बिहार और अन्य राज्यों के चुनावी नतीजों ने साबित कर दिया है कि जनता अब परिवारवाद और जातिवाद की राजनीति पसंद नहीं करती; वे केवल विकास और सुशासन (Governance) चाहते हैं। कांग्रेस को "भ्रष्टाचार की जननी" बताते हुए उन्होंने सपा और कांग्रेस के गठबंधन पर निशाना साधा और कहा कि इनका कोई राजनीतिक भविष्य नहीं है। यह बयान ऐसे समय में आ रहे हैं जब उत्तर प्रदेश में 2027 के चुनावों के लिए अभी से बिसात बिछने लगी है। केशव प्रसाद मौर्य लगातार पिछड़ों और दलितों के बीच पैठ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि 2024 के लोकसभा चुनावों में हुए नुकसान की भरपाई की जा सके।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 14, 2026, 03:16 IST
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