कल्याण सिंह का राजनीतिक सफर: शिक्षक से सूबे में पिछड़ों की सियासत के सिकंदर बने रामभक्त, अधूरी रह गई ये इच्छा
राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरा व दो बार सूबे के मुख्यमंत्री रहे रामभक्त कल्याण सिंह का सियासी सफर संघर्षों से भरा रहा। इसी संघर्ष का परिणाम रहा कि वे संघ के स्वयं सेवक और इंटर कॉलेज के शिक्षक से लेकर सूबे में पिछड़ों की सियासत के मास्टर तक बने। देश की सियासत में उन्हें हिंदुत्व के नायक का खिताब दिया गया। पद के लिए उन्होंने न कभी उसूलों से समझौता किया और न राजनीति से। वे हिंदू हृदय सम्राट तक कहलाए। अतरौली तहसील के गांव मढ़ौली गांव में साधारण किसान परिवार में जन्मे कल्याण सिंह प्रदेश की राजनीति के शिखर पर पहुंचे। बचपन में राष्ट्रीय स्वयं सेवकसंघ से जुड़े। फिर उच्च शिक्षा हासिल कर अतरौली के एक इंटर कॉलेज में अध्यापक बने। 1967 में पहली बार अतरौली से विधायक बने। आपातकाल में 21 महीने तक अलीगढ़ व बनारस की जेल में रहे।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 05, 2026, 13:53 IST
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