Jammu: रामबन और रियासी में पुराने लैंडस्लाइड जोन फिर हुए एक्टिव... चट्टानों के कटने से ढलानें अस्थिर

रामबन और रियासी में पुराने भूस्खलन क्षेत्र फिर से सक्रिय हो गए हैं। ये क्षेत्र सैकड़ों साल पुराने हैं। जलवायु परिवर्तनशीलता यानी अल्पकालिक जलवायु परिवर्तन के कारण हो रही अत्यधिक वर्षा से हालात बिगड़ रहे हैं। खास तौर पर बादल फटने और भूस्खलन जैसी घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। नाशरी टनल से लेकर पंथ्याल तक का 20-30 किलोमीटर का क्षेत्र बेहद संवेदनशील हो गया है। जम्मू स्थित पश्चिमी हिमालय अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक और रामबन में भूस्खलन पर लंबे समय तक कार्य कर चुके रियाज मीर के अनुसार, एनएच-44 पर हो रही विकास संबंधी गतिविधियां, जैसे सड़क बनाने के लिए चट्टानों का काटा जाना, इस इलाके से एमबीटी (मेन बाउंड्री थ्रस्ट) का गुजरना, जलवायु में आ रहा बदलाव और रामबन की मुरी चट्टान संरचना, ये सब मिलकर रामबन को भूस्खलन के लिए बेहद संवेदनशील बनाते हैं। चट्टानों को काटे जाने से ढलान अस्थिर हो जाती है। मिट्टी का क्षरण अधिक होता है। ऐसे में अत्यधिक वर्षा मलबे को अपने साथ बहा ले जाती है। ऐसे क्षेत्रों में पिछले एक दशक में निर्माण में तेजी आने से जान-माल की हानि बढ़ी है।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Aug 31, 2025, 11:16 IST
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