Water Resource Assessment: सैटेलाइट से खोजे जाएंगे पानी के भंडार, जल शक्ति मंत्रालय और इसरो के बीच समझौता संभव

जल शक्ति मंत्रालय और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के बीच एक बड़े समझौता ज्ञापन (एमओयू) होने की संभावना है। इस एमओयू में जल संसाधनों के आकलन, निगरानी और प्रबंधन के लिए उपग्रह आधारित अनुप्रयोगों तथा उन्नत तकनीकों को मजबूत करने का उद्देश्य शामिल है। इसके लिए 24 प्राथमिक अध्ययन और सहयोग के क्षेत्रों की पहचान की जा चुकी है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि यह एमओयू एक जून को दिल्ली के डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित होने वाली जल क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास पर राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान हस्ताक्षरित किया जा सकता है। ये भी पढ़ें:Attack on Abhishek Banerjee:ममता बनर्जी पर अस्पताल के CEO को धमकाने का आरोप, BJP नेता ने साझा किया वीडियो मिशन फॉर एडवांसमेंट इन हाई-इंपैक्ट एरियाज फॉर वॉटर की शुरुआत कार्यक्रम की प्रमुख उपलब्धियों में से एक 'मिशन फॉर एडवांसमेंट इन हाई-इंपैक्ट एरियाज फॉर वॉटर' की शुरुआत होगी। यह जल शक्ति मंत्रालय और अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की संयुक्त पहल है। इसका उद्देश्य जल संसाधन प्रबंधन, पेयजल, जलवायु अनुकूलन क्षमता और जल उपयोग दक्षता जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में अत्याधुनिक शोध को बढ़ावा देना है। इस पहल के तहत शोध प्रस्तावों के लिए एक खुली आमंत्रण प्रक्रिया की भी घोषणा की जाएगी। मंत्रालय जल क्षेत्र में उत्पाद और प्रोटोटाइप विकास को समर्थन देने के लिए BHARAT-WIN पोर्टल के माध्यम से स्टार्टअप्स और एमएसएमई के लिए भी खुली आमंत्रण प्रक्रिया शुरू करेगा। 'जल संचय जन भागीदारी: कैच द रेन' नाम का डिजिटल मंच कार्यशाला के दौरान 'जल संचय जन भागीदारी: कैच द रेन' नामक एक डिजिटल मंच भी शुरू किया जाएगा। इसका उद्देश्य समुदाय आधारित जल संरक्षण प्रयासों को मजबूत करना है। यह मंच नागरिकों, संस्थानों और स्थानीय निकायों को जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण से जुड़ी पहलों का दस्तावेजीकरण और प्रदर्शन करने में मदद करेगा। एक दिवसीय कार्यशाला का संयुक्त रूप से उद्घाटन केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह, जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी और इसरो अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव वी नारायणन करेंगे।इस कार्यशाला में सरकार, उद्योग और शिक्षाविदों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसका उद्देश्य भारत के जल अनुसंधान तंत्र को मजबूत करना और टिकाऊ जल प्रबंधन के लिए नवाचार आधारित समाधानों को बढ़ावा देना है। कार्यशाला के साथ प्रदर्शनी का भी होगा आयोजन तकनीकी सत्रों में भूजल प्रबंधन, सिंचाई पद्धतियां, नदी स्वरूप, बाढ़ क्षेत्र मानचित्रण, जलवायु अनुकूलन क्षमता, पारिस्थितिक आकलन, बांध सुरक्षा, शहरी जलभृत मानचित्रण तथा जल प्रशासन में रिमोट सेंसिंग और उन्नत तकनीकों के उपयोग जैसे विषयों पर चर्चा होगी। विचार-विमर्श के दौरान पिछले 12 वर्षों में जल क्षेत्र में किए गए अनुसंधान के प्रभाव का आकलन भी किया जाएगा। साथ ही 16वें वित्त आयोग चक्र के लिए रणनीतिक प्राथमिकताओं और आगे की दिशा पर चर्चा होगी। ये भी पढ़ें:Tamil Nadu:प्राइवेट स्कूलों को नोटिस बोर्ड पर लिखनी होगी ट्यूशन फीस, तय सीमा से ज्यादा वसूली पर मान्यता रद्द बयान के अनुसार, कार्यशाला के साथ एक प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी, जिसमें जल क्षेत्र से जुड़ी नवोन्मेषी तकनीकों, शोध परिणामों और सर्वोत्तम प्रथाओं का प्रदर्शन किया जाएगा। यह मंच शोध संस्थानों, स्टार्टअप्स, एमएसएमई और तकनीकी संगठनों को टिकाऊ जल प्रबंधन के लिए तकनीक आधारित समाधानों को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करेगा।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: May 31, 2026, 15:10 IST
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