ईरान ने समझौते में रखीं क्या शर्तें?: लेबनान संघर्ष से होर्मुज में सेवा शुल्क तक, US को अराघची ने दी चेतावनी

पश्चिम एशिया संघर्ष का कूटनीतिक हल खोजने की कोशिशें कामयाब होती नजर आ रही हैं। अमेरिका और ईरान की ओर से शांति समझौते को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित समझौते में तेहरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों को शामिल किया जाएगा। ईरान की सरकारी मीडिया इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (आईआरआईबी) के अनुसार अब्बास अराघची ने कहा कि यह समझौता दो चरणों में होगा। उन्होंने बताया कि पहले चरण में परमाणु मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई और इसे दूसरे चरण के लिए टाल दिया गया है। अब्बास अराघची ने किन शर्तों को बताया अहम ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि अगर समझौते में शामिल प्रावधानों का पालन नहीं किया गया तो अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए जाएंगे। अराघची ने कहा, "समझौते में सबसे पहले अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने का जिक्र किया गया है।" उन्होंने कहा, "अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलना संभव नहीं है, लेकिन सेवा शुल्क लिया जाएगा। ईरान को मुआवजा देने की योजना भी इसमें शामिल है।" विदेश मंत्री ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब भी ईरान और ओमान की संप्रभुता के तहत है। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य का भविष्य अतीत जैसा नहीं होगा। उन्होंने संकेत दिया कि इसके प्रबंधन को लेकर ईरान और ओमान जल्द ही एक संयुक्त बयान जारी करेंगे। परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे पर उन्होंने कहा, "इस चरण में हमने परमाणु मुद्दों पर चर्चा नहीं की। हालांकि, संवर्धित परमाणु सामग्री को लेकर हमारी स्थिति स्पष्ट है कि अगर इसे कम करने की प्रक्रिया होगी तो वह ईरान के भीतर ही होगी, किसी अन्य देश में नहीं।" लेबनान में संघर्ष खत्म करना भी समझौते में शामिल अराघची ने कहा, "प्रारंभिक समझौते का मसौदा दो पृष्ठों का है। इसके अनुसार ईरान की कोई भी जब्त की हुई संपत्ति फ्रीज नहीं रह सकती।" उन्होंने कहा कि इस समझौते में वॉशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव के अन्य प्रमुख मुद्दों को भी शामिल किया जाएगा। इनमें अमेरिका की ओर से यह लिखित आश्वासन भी होगा कि वह ईरान की संप्रभुता का सम्मान करता है। अराघची ने कहा, "हम लेबनान में हिज्बुल्ला को कभी अकेला नहीं छोड़ेंगे और लेबनान में युद्ध का अंत सभी मोर्चों पर होगा।" यह बयान ऐसे समय आया है जब अराघची ने हाल ही में कहा था कि "इस्लामाबाद समझौता पहले से कहीं अधिक अंतिम रूप के करीब है", जिससे संकेत मिलता है कि समझौते को जल्द अंतिम रूप दिया जा सकता है। समझौते की शर्ते पूरी करने के लिए अमेरिका को मिलेंगे 60 दिन ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि प्रारंभिक समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद अमेरिका को अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए 60 दिन का समय दिया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर वादे पूरे नहीं किए गए तो स्थिति फिर पहले जैसी हो सकती है। अराघची ने कहा, "प्रारंभिक समझौते पर हस्ताक्षर के बाद हम अमेरिका को अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने के लिए 60 दिन का समय देंगे। इस दौरान हम किसी नई समझ तक पहुंच सकते हैं या युद्धविराम की अवधि बढ़ाई जा सकती है। यह भी संभव है कि 60 दिन बाद हम फिर पुरानी स्थिति में लौट जाएं। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (एसएनएससी) के भीतर इस मसौदे के समर्थक और विरोधी दोनों हैं, लेकिन अंतिम फैसला सामूहिक रूप से लिया जाएगा। फिलहाल हमें इंतजार करना होगा। अगर मंजूरी मिलती है तो समझौते पर दूरस्थ रूप से हस्ताक्षर किए जाएंगे।" अमेरिका पर भरोसा नहीं : अब्बास अराघची उन्होंने कहा, "वादा तोड़ना अमेरिकी नेताओं की प्रकृति में है। हमें समझौते को लागू करने में बड़ी बाधाओं की उम्मीद रखनी चाहिए। हम ऐसे लोगों के साथ बातचीत कर रहे हैं जो पूरी तरह समझौते के प्रति प्रतिबद्ध नहीं हैं। इसलिए ईरान किसी भी ऐसी खामी को बंद करेगा, जिसका इस्तेमाल समझौते का पालन न करने के लिए किया जा सके।" अराघची ने कहा, "हम अपनी सुरक्षा की गारंटी के लिए सुरक्षा परिषद, संयुक्त राष्ट्र या किसी अंतर-क्षेत्रीय गठबंधन पर निर्भर नहीं हैं। हमारा भरोसा केवल ईश्वर, अपनी जनता और अपनी सशस्त्र सेनाओं पर है।"

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 13, 2026, 01:57 IST
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