मुद्दा: आखिर क्या होगा तेहरान का भविष्य? जेन-जी के विद्रोह से हिलता इस्लामी गणराज्य और पश्चिम की चिंता
तेहरान की एक सड़क के बीचोंबीच एक अकेला व्यक्ति घुटनों के बल बैठा हुआ था। उसने काली जैकेट सिर पर खींच रखी थी और वह आगे बढ़ रही ईरानी सुरक्षा बलों की टुकड़ी के सामने अडिग खड़ा था। इस दृश्य का वीडियो ईरानियों के बीच तेजी से वायरल हो गया। इसी तरह के दृश्य पूरे ईरान में देखने को मिले हैं, जिसमें कहीं युवा प्रदर्शनकारी अकेले, तो कहीं दो-चार के समूह में, अपने दमनकर्ताओं के सामने शांतिपूर्वक खड़े या घुटनों के बल बैठे नजर आए। 28 दिसंबर से शुरू हुए ये विरोध प्रदर्शन ईरान के सभी प्रांतों में फैल चुके हैं। कुछ प्रदर्शनकारियों ने 1979 की क्रांति में अपदस्थ किए गए पहलवी राजवंश की वापसी की मांग भी की। ये विरोध प्रदर्शन 2022 में शुरू हुए वुमन, लाइफ, फ्रीडम आंदोलन के बाद सबसे बड़े माने जा रहे हैं। हालांकि, इस बार आंदोलन की तात्कालिक वजह ईरानी रियाल का डॉलर के मुकाबले बुरी तरह गिरना रहा। पर मूल शिकायतें वही हैं-सरकारी कुप्रबंधन, भ्रष्टाचार और दमन। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि इस्लामी गणराज्य को सत्ता से हटाया जाए। दरअसल, इस्लामी गणराज्य में अस्थिरता बढ़ती जा रही है। पिछले वर्ष जून में इस्राइल के साथ हुए 12 दिवसीय युद्ध में इसकी कमजोरियां उभर कर सामने आईं। अमेरिकी बमबारी ने रही-सही कसर पूरी कर दी। संसाधन संपन्न देश में बिजली और पानी की किल्लत दिख रही है, जबकि 80 वर्षीय खामनेई प्रतिरोध की पुरानी रणनीति पर ही डटे हुए हैं। वेनेजुएला के तानाशाह की गिरफ्तारी से उत्साहित ट्रंप ईरान पर दबाव बनाए हुए हैं, और उनका दबाव कुछ हद तक काम करता दिखने भी लगा है। पर सवाल यह है कि अगर इस्लामी गणराज्य अपने वर्तमान स्वरूप में अस्तित्व में नहीं रहता है, तो पश्चिम के पास ईरानी जनता का समर्थन करने की कोई योजना है। ईरान में विरोध प्रदर्शनों का एक लंबा अतीत रहा है, लेकिन इस बार युवाओं का उत्साह देखने लायक है। युवा महिलाएं और जेन जी इस्लामी गणराज्य के आगे झुकने को बिल्कुल तैयार नहीं है। इस्लामिक गणराज्य कई चुनौतियों का सामना कर रहा है: इस्राइल के साथ फिर से युद्ध का मंडराता खतरा, सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामनेई के उत्तराधिकारी के संभावित चुनाव को लेकर उथल-पुथल और लगातार विरोध प्रदर्शनों की संभावना। कई अमेरिकी और पश्चिमी नीति निर्माता व विश्लेषक अनिश्चितता के डर से ईरान में बदलाव की संभावना से घबराते हैं। पश्चिम को हर तरह की स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्हें ईरान में संभावित परिवर्तन के लिए गंभीर नीतिगत योजना बनानी चाहिए। ईरान नौ करोड़ से अधिक आबादी वाला देश है, और इसमें शासन के पतन के साथ उत्पन्न होने वाली अस्थिरता की लहरों के बारे में सभी को चिंतित होना चाहिए। कई संभावित परिदृश्य सामने आ सकते हैं। एक संभावना यह है कि नागरिक समाज, सामूहिक निकाय या रजा पहलवी के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार बने, जिसे लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित करने और चुनाव कराने का कार्य सौंपा जाए। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर के भीतर से कोई व्यक्ति सत्ता हथियाने और मौजूदा व्यवस्था को नए रूप में संरक्षित करने का प्रयास कर सकता है। पश्चिमी सरकारों को ट्रंप प्रशासन द्वारा इंटरनेट स्वतंत्रता कार्यक्रमों और ईरान पर काम करने वाले मानवाधिकार संगठनों के लिए धन में कटौती करके पैदा किए गए अंतर को भरने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए। 1979 की ईरानी क्रांति के बाद, तेहरान में तत्कालीन ब्रिटिश राजदूत एंथनी पार्सन्स ने टिप्पणी की थी कि अब जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं, तो मेरा मानना है कि हमारी विफलता सूचना की कमी से कहीं अधिक कल्पना की कमी के कारण थी। वाशिंगटन और उसके पश्चिमी सहयोगियों को यह गलती दोबारा नहीं दोहरानी चाहिए। -द न्यूयॉर्क टाइम्स
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 16, 2026, 07:38 IST
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