स्वदेशी मिसाइल MPATGM का सफल परीक्षण: दुश्मनों के टैंकों का बनेगी काल, रक्षा मंत्री ने दी बधाई, जानें खासियतें
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) को स्वदेशी मैन फोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एमपीएटीजीएम) के सफल परीक्षण की बधाई दी है। बता दें कि डीआरडीओ ने स्वदेशी मैन फोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल का महाराष्ट्र के अहिल्या नगर की केके रेंज में सफल परीक्षण किया था। मिसाइल टॉप अटैक मोड में गतिशील लक्ष्य को मारने में पूरी तरह सफल रही। स्वदेशी मैन फोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (एमपीएटीजीएम) तीसरी पीढ़ी की दागो और भूल जाओ (फायर एंड फॉरगेट) मिसाइल है। इसे दागने के बाद नियंत्रित करने की आवश्यकता नहीं होती है। यह मिसाइल दुश्मनों के टैंकों के लिए काल साबित होगी। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि डीआरडीओ ने रविवार को महाराष्ट्र के अहिल्या नगर स्थित केके रेंज में उच्चतम आक्रमण क्षमता वाली तीसरी पीढ़ी की दागो और भूल जाओ एमपीएटीजीएम का सफल उड़ान परीक्षण किया। यह मिसाइल बहुत हल्की है और इसे आसानी से कंधे पर उठाकर ले जाया जा सकता है। मिसाइल में इन तकनीकों का हुआ इस्तेमाल लक्ष्य के रूप में एक थर्मल टारगेट सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। इसे जोधपुर की रक्षा लैबोरेटरी ने तैयार किया। यह सिस्टम एक चलते हुए टैंक की तरह का था। मिसाइल ने टॉप अटैक मोड में गतिशील लक्ष्य को सटीक निशाना लगाकर नष्ट कर दिया।स्वदेशी रूप से विकसित इस मिसाइल में इमेजिंग इन्फ्रारेड (आईआईआर) होमिंग सीकर, ऑल इलेक्ट्रिक कंट्रोल एक्चुएशन सिस्टम, फायर कंट्रोल सिस्टम, टैंडम वारहेड, प्रणोदन प्रणाली और उच्च प्रदर्शन लक्ष्यीकरण प्रणाली जैसी अत्याधुनिक स्वदेशी प्रौद्योगिकियां शामिल हैं। ये भी पढ़ें:करूर भगदड़ मामले में विजय से 6 घंटे हुई पूछताछ, कल फिर सीबीआई के सामने पेश होंगे एक्टर रक्षा मंत्री ने दी बधाई रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एमपीएटीजीएम के सफल परीक्षण के लिए डीआरडीओ, सहयोगियों और रक्षा इंडस्ट्री को बधाई दी और इसे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। टीम को बधाई देते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी कामत ने कहा कि परीक्षण सफलतापूर्वक किया गया, जिससे हथियार प्रणाली को भारतीय सेना में शामिल करने का रास्ता साफ हो गया है। मिसाइल को डीआरडीओ की सहयोगी प्रयोगशालाओं अनुसंधान केंद्र इमारत (हैदराबाद), टर्मिनल बैलिस्टिक्स अनुसंधान प्रयोगशाला (चंडीगढ़) उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला (पुणे) और उपकरण अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (देहरादून) ने विकसित किया है। मुख्य खासियतें: टॉप अटैक क्षमता: मिसाइल टैंक के ऊपर से हमला करती है, जहां उसकी सुरक्षा सबसे कमजोर होती है। आगे का हिस्सा सबसे मजबूत होने के कारण ऊपर से हमला होने पर बचाव मुश्किल हो जाता है। इमेजिंग इन्फ्रारेड (IIR) होमिंग सीकर: दिन और रात, दोनों परिस्थितियों में प्रभावी। थर्मल इमेजिंग के जरिए लक्ष्य की सटीक पहचान करती है। टैंडम वॉरहेड तकनीक: दोहरे विस्फोटक हेड से लैस—पहला रिएक्टिव आर्मर को निष्क्रिय करता है, दूसरा टैंक की मुख्य बॉडी को नष्ट करता है। आधुनिक मुख्य युद्धक टैंकों को भी भेदने में सक्षम। ऑल-इलेक्ट्रिक कंट्रोल सिस्टम: अत्यंत तेज़ प्रतिक्रिया और उच्च सटीकता सुनिश्चित करता है। उच्च प्रदर्शन साइटिंग सिस्टम: सैनिक को लक्ष्य स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जिससे निशाना अधिक सटीक होता है। उन्नत प्रोपल्शन सिस्टम: तेज़ गति और लंबी दूरी तक प्रभावी मार करने में सक्षम। लॉन्चिंग के लचीले विकल्प: मिसाइल को ट्राइपॉड या सैन्य वाहन पर लगे लॉन्चर से दागा जा सकता है।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 12, 2026, 19:09 IST
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