Semiconductor: सेमीकंडक्टर निर्माण में भारत लगाएगा बड़ी छलांग, 2030 तक 110 अरब डॉलर बाजार तैयार होने का अनुमान

केंद्र सरकार ने रविवार को एक आधिकारिक बयान में कहा कि भारत जल्द ही वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में एक अहम भूमिका निभा सकता है। दुनिया भर में सेमीकंडक्टर उद्योग का आकार 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। ये भी पढ़ें:IT Sector:छंटनी के दौर में वित्तीय स्थिरता और जरूरी खर्चों के लिए ऐसे करें तैयारी; निवेश, आपातकालीन फंड बनाएं दशक के अंत तक 110 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना वर्ष 2023 में भारत का सेमीकंडक्टर बाजार लगभग 38 अरब डॉलर का था। यह 2024-25 तक बढ़कर 45 से 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। दशक के अंत तक इसके 100 से 110 अरब डॉलर के बीच पहुंचने की संभावना जताई गई है। बड़ी निवेश घोषणाएं सरकार ने कहा कि नीति समर्थन, वैश्विक साझेदारियों और घरेलू विनिर्माण क्षमताओं में वृद्धि के साथ भारत इस क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत का चिप इकोसिस्टम तेजी से विकसीत हो रहा है। देश के कई भागों में बड़े निवेश की घोषणा की गई है। जून 2023 में, माइक्रोन टेक्नोलॉजी ने गुजरात के साणंद में एटीएमपी सुविधा स्थापित करने के लिए 22,516 करोड़ रुपये की प्रतिबद्धता जताई थी। फरवरी 2024 में, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने ताइवान की पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेशन के साथ साझेदारी में। गुजरात के धोलेरा में 91,000 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की। इसकी उत्पादन क्षमता 50,000 वेफर्स प्रति माह होगी। उसी महीने, सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस ने रेनेसास और स्टार्स के साथ मिलकर साणंद में 7,600 करोड़ रुपये की लागत से एक संयंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। यह प्रतिदिन 1.5 करोड़ चिप्स का उत्पादन कर सकेगा। टाटा सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट प्राइवेट लिमिटेड (टीएसएटी) असम के मोरीगांव में 27,000 करोड़ रुपये की लागत से एक संयंत्र स्थापित करेगी। इसकी दैनिक क्षमता 4.8 करोड़ चिप्स होगी। सितंबर 2024 में, केनेस सेमीकॉन प्राइवेट लिमिटेड ने 3,307 करोड़ रुपये के निवेश और प्रतिदिन 6.33 मिलियन चिप्स की उत्पादन क्षमता के साथ साणंद में परिचालन शुरू करने की योजना बनाई है। मई 2025 तक, एचसीएल और फॉक्सकॉन के संयुक्त उद्यम द्वारा उत्तर प्रदेश के जेवर में एक सुविधा शुरू करने की उम्मीद है। इसमें 3,700 करोड़ रुपये का निवेश और 20,000 वेफर्स प्रति माह या 36 मिलियन यूनिट प्रति वर्ष की उत्पादन क्षमता होगी। तीन मुख्य स्तंभ ये परियोजानएं वैश्विक सेमीकंडक्टर केंद्र बनने की दिशा में भारत की बढ़ती गति को उजागर करते हैं। सरकार ने कहा कि भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण के तीन प्रमुख स्तंभों, उपकरण, सामग्री और सेवाओं में महत्वपूर्ण योगदान देने की क्षमता है। उपकरण के मोर्चे पर, भारत सेमीकंडक्टर उपकरणों के लिए जरूरी घटकों का उत्पादन करने के लिए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के अपने मजबूत आधार का लाभ उठा रहा है। सामग्रियों के संदर्भ में, भारत रसायनों, खनिजों और गैसों से समृद्ध है, जो इसे सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला की कच्चे माल की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उपयुक्त बनाता है। सेवा क्षेत्र में, भारत के पास अनुसंधान एवं विकास, लॉजिस्टिक्स और एआई, बिग डेटा, क्लाउड कंप्यूटिंग और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे क्षेत्रों में विशाल प्रतिभा पूल मौजूद है।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Aug 04, 2025, 12:47 IST
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