रिपोर्ट: नए साल में भारत बना सबसे आशावादी उपभोक्ता बाजार, 60% भारतीय अगले छह माह में बढ़ाएंगे अपना घरेलू खर्च
भारत नए साल में सबसे आशावादी उपभोक्ता बाजार के रूप में उभर रहा है, जिसमें भारतीयों में घरेलू खर्च करने के इरादे में मजबूत बढ़ोतरी हुई है। खास बात है कि खर्च को लेकर आत्मविश्वास का स्तर कई प्रमुख देशों की तुलना में ज्यादा है। नुवामा की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब 60 फीसदी भारतीय उपभोक्ताओं को उम्मीद है कि वे अगले छह महीनों में अपना घरेलू खर्च बढ़ाएंगे। खर्च करने की यह इच्छा उपभोक्ताओं के बढ़ते आत्मविश्वास और बेहतर आर्थिक स्थितियों की उम्मीदों को स्पष्ट दिखाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, व्यापक तौर पर देखें तो मजबूत आर्थिक वृद्धि, महंगाई में राहत, औद्योगिक गतिविधियों में तेजी और आय वृद्धि के दम पर भारतीय उपभोक्ता घरेलू खर्च को लेकर आशावद के मामले में प्रमुख देशों से काफी आगे हैं। इनमें शुद्ध आशावाद का स्तर 27 फीसदी है, जबकि वैश्विक औसत शून्य से नीचे 12 फीसदी है। इस मामले में चीन सबसे आगे है, जहां उपभोक्ता घरेलू खर्च बढ़ाने को लेकर आश्वस्त हैं। भारत इस मामले में दूसरे स्थान पर है। स्नैक्स और सॉफ्ट ड्रिंक्स पर कम खर्च की योजना वाहन, मोबाइल फोन और घर के किराये जैसी लंबी अवधि वाली एवं जरूरी कैटेगरी के लिए खर्च करने का इरादा ज्यादा मजबूत बना हुआ है। इसके उलट, पैक्ड स्नैक्स और सॉफ्ट ड्रिंक्स जैसी रोजाना इस्तेमाल होने वाली कैटेगरी के लिए इरादा तुलनात्मक रूप से कम है। यह रोजाना के खर्च के लिए ज्यादा सोच-समझकर और मूल्य आधारित अप्रोच दिखाता है। ये भी पढ़ें:-2000 Notes:₹2000 के नोटों पर बड़ा अपडेट, 98.4% से अधिक करेंसी बैंकों में लौटी, जानें अब क्या है स्थिति नई कारें खरीदने पर सर्वाधिक खर्च करेंगे लोग भारतीय उपभोक्ता जिन मोर्चों पर सर्वाधिक खर्च करना चाहते हैं, उनमें गाड़ियां सबसे आगे हैं। 70 फीसदी भारतीय उपभोक्ता नई कारें खरीदने के लिए सबसे ज्यादा खर्च करने की योजना बना रहे हैं। इसके बाद 63 फीसदी उपभोक्ता स्मार्टफोन और मोबाइल प्लान पर खर्च बढ़ाने की तैयारी में हैं।एक तिहाई भारतीय उपभोक्ता कुल मिलाकर ज्यादा खर्च करने की योजना बना रहे हैं, जिसमें गैर-जरूरी खरीदारी मुख्य वजह बनकर उभरी है। गैर-जरूरी खर्च करने के इरादे का यह स्तर सभी रिकॉर्ड किए गए बाजारों में सबसे ज्यादा है। अच्छे दिन आने की उम्मीद, पर मंदी की भी चिंता करीब 61 फीसदी भारतीय उपभोक्ताओं का मानना है कि आगे भी अच्छे दिन आएंगे। हालांकि, 34 फीसदी को बड़े पैमाने पर बेरोजगारी या मंदी आने की आशंका है। 17 फीसदी का कहना है कि कई देशों में तनाव और अन्य राजनीतिक घटनाओं से भारत की वृद्धि दर धीमी हो सकती है, जो चीन के बाद दूसरा सबसे कम स्तर है। इसके उलट, यूके, फ्रांस और जर्मनी के 60 फीसदी लोगों में वृद्धि दर घटने की आशंका है।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 02, 2026, 05:47 IST
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