जब्त संपत्ति सुपुर्दगी पर छोड़ते समय अव्यावहारिक शर्तें नहीं लगाई जा सकतीं: हाईकोर्ट
अमर उजाला ब्यूरोचंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जब्त संपत्ति को सुपुर्दगी पर छोड़ते समय अदालतों को कठोर, अव्यावहारिक या दंडात्मक शर्तें नहीं लगानी चाहिए। अदालत ने कहा कि ऐसी शर्तों का उद्देश्य केवल साक्ष्य की सुरक्षा होना चाहिए न कि नागरिकों को परोक्ष रूप से दंडित करना।हाईकोर्ट ने मोगा के एक मामले में बताया कि जब्त संपत्ति का साक्ष्य मूल्य फोटोग्राफ, वीडियोग्राफी या विस्तृत पंचनामे के माध्यम से सुरक्षित किया जा सकता है। ऐसे में संपत्ति को लंबे समय तक वास्तविक मालिक से दूर रखना या अत्यधिक बोझिल शर्तें थोपना अनुचित और असंगत है। अदालत ने व्याख्या की कि सुपुर्दगी की व्यवस्था इसलिए है ताकि लंबित मामलों के दौरान संपत्ति जंग, क्षय या नष्ट होने से बची रहे। वाहन जंग खा जाते हैं, मशीनें खराब होती हैं और दस्तावेज़ अपनी उपयोगिता खो देते हैं, जिससे नागरिकों को नुकसान और राज्य पर अनावश्यक बोझ पड़ता है।एक हाथ से लाभ देकर दूसरे से छीन लेने के समानहाईकोर्ट ने कहा कि बैंक गारंटी की अत्यधिक मांग, संपत्ति के अवमूल्यित मूल्य से अधिक जमानत और उपयोग पर अनुचित प्रतिबंध रिहाई के आदेश को व्यावहारिक रूप से निष्फल बना सकते हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि यह एक हाथ से लाभ देकर दूसरे से छीन लेने के समान है। साथ ही, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि संपत्ति स्वयं अपराध का विषय हो जैसे चोरी की नकदी या आभूषण तो जमानत उसकी कीमत के बराबर हो सकती है। लेकिन वाहन या अन्य सहायक वस्तुओं पर पूरे बाजार मूल्य के बराबर शर्तें लगाना असंगत और दंडात्मक है। हाईकोर्ट का निर्णय नागरिकों के अधिकार और न्यायिक सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
#ImpracticalConditionsCannotBeImposedWhenReleasingSeizedProperty:HighCourt #VaranasiLiveNews
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 12, 2026, 19:34 IST
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