High Court : इकबाल-ए-जुर्म के बाद भी आरोप सिद्ध करने की जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता अभियोजन

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिना सुबूत महज इकबाल-ए-जुर्म के आधार पर उम्रकैद की सजा पाए दोषी को बरी कर दिया। कहा, जुर्म कुबूल करने के बाद भी अभियोजन आरोप सिद्ध करने की अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता। इसी टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति संजीव कुमार की खंडपीठ ने मैनपुरी निवासी आजाद खान की दोषसिद्धि के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी आरोपी को केवल सफाई साक्ष्य के दौरान दिए गए बयान में कथित स्वीकारोक्ति के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता, खासकर तब जब अभियोजन पक्ष दोष सिद्ध करने के लिए कोई ठोस या सहायक साक्ष्य प्रस्तुत करने में पूरी तरह विफल रहा हो। कोर्ट ने कहा कि सफाई साक्ष्य के दौरान दर्ज स्वीकारोक्ति को वास्तविक स्वीकारोक्ति नहीं माना जा सकता। क्योंकि, यह जीवन के भय या मानसिक दबाव का परिणाम भी हो सकती है। कोर्ट ने पाया कि ट्रायल के दौरान अभियोजन की ओर से मात्र एक कांस्टेबल को बतौर औपचारिक गवाह पेश किया गया। इसके अलावा अभियोजन आरोपी के खिलाफ किसी भी तरह का सुबूत पेश करने में विफल रहा।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Dec 24, 2025, 14:22 IST
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