Health Insurance: सावधान! स्वास्थ्य बीमा होने के बाद भी जेब से न भरना पड़े भारी बिल; जानिए बचाव के तरीके

अगर आप यह सोचकर चैन की नींद सो रहे हैं कि आपके पास हेल्थ इंश्योरेंस है और मुसीबत आने पर बीमा कंपनी सारा बिल चुका देगी, तो जाग जाइए। IRDAI के आंकड़े आपकी नींद उड़ा देंगे। वित्त वर्ष 2023-24 में 11% हेल्थ क्लेम को बीमा कंपनियों ने सिरे से खारिज कर दिया। ये कोई छोटी-मोटी रकम नहीं है-कुल 26,000 करोड़ रुपये के बिलों को कंपनियों ने रिजेक्ट कर दिया। इसका सीधा मतलब समझिए, हर 10 में से 1 आदमी को अस्पताल के बिस्तर से उठने के बाद अपनी जमा-पूंजी से या कर्ज लेकर बिल चुकाना पड़ा। क्लेम रिजेक्ट होने के पीछे कुछ आम गलतियां हैं, जिन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज करते हैं : वेटिंग पीरियड: लोग पॉलिसी लेते ही अस्पताल की ओर दौड़ते हैं। उन्हें नहीं पता कि वेटिंग पीरियड नाम की भी कोई चीज होती है। 30 दिन का शुरुआती लॉक-इन और बीमारियों के लिए 2 से 3 साल का इंतजार करना होता है। इस वजह से सबसे ज्यादा 25% क्लेम रिजेक्ट होते हैं। ओपीडी का चक्कर: आज भी लोग OPD और IPD का फर्क नहीं समझते। 25% क्लेम सिर्फ इसलिए खारिज हुए क्योंकि वे खर्च पॉलिसी के दायरे से बाहर थे। समय पर जवाब नहीं: बीमा कंपनी ने सवाल पूछा, आपने जवाब नहीं दिया। 18% क्लेम सिर्फ 'लैक ऑफ रिस्पॉन्स की वजह से रद्द हो गए। गैर जरूरी भर्ती: अगर डॉक्टर ने आपको सिर्फ ऑब्जर्वेशन के लिए भर्ती किया है और इलाज घर पर संभव था, ऐसे मामलों में 16% क्लेम फंस गए। क्लेम को रिजेक्ट होने से बचाने के लिए ये तीन काम आज ही करें: पॉलिसी लेते समय अपनी पुरानी बीमारियों के बारे में सच-सच बताएं। अगर झूठ पकड़ा गया, तो 100% रिजेक्शन पक्का है। डिस्चार्ज समरी, बिल, डॉक्टर के नोट्स और दवाइयों के पर्चे, इन सबको संभाल कर रखें। डिस्चार्ज के 30 दिनों के भीतर क्लेम जमा जरूर करें। हमेशा कैशलेस प्री-ऑथराइजेशन की कोशिश करें। इससे आपको अस्पताल में भर्ती होने से पहले ही पता चल जाएगा कि कंपनी कितना पैसा देगी।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Dec 29, 2025, 06:27 IST
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