क्रेडिट कार्ड का बिल बना सिरदर्द?: मिनिमम पेमेंट की भूल पड़ सकती है भारी; जानिए कर्ज से निकलने के तरीके

देश में क्रेडिट कार्ड उपयोगकर्ताओं और बकाये दोनों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। केवल न्यूनतम भुगतान करने की आदत लोगों को भारी ब्याज के कारण कर्ज के जाल में फंसा देती है। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर पूरा भुगतान, महंगे कर्ज को कम ब्याज वाले विकल्प में बदलना, बैलेंस ट्रांसफर का सोच-समझकर उपयोग और अंतिम विकल्प के रूप में ही सेटलमेंट अपनाना चाहिए। सबसे जरूरी है कि खर्च करने की आदतों में सुधार किया जाए, ताकि कर्ज का बोझ लगातार न बढ़े। क्या आसान ईएमआई और क्रेडिट कार्ड बढ़ा रहे हैं कर्ज का बोझस्मार्टफोन, टीवी, फ्रिज, एसी और गाड़ियों से लेकर विदेश यात्राओं तक के शौक अब बचत से नहीं, बल्कि क्रेडिट कार्ड और आसान किस्तों के सहारे पूरे हो रहे हैं। हालत यह है कि बाजार में बिकने वाले 70 फीसदी आईफोन ईएमआई पर खरीदे जा रहे हैं। वहीं, 30 फीसदी पर्सनल लोन केवल छुट्टियों में घूमने-फिरने के लिए लिया जा रहा है। कैसे बन जाता है क्रेडिट कार्ड कर्ज का जाल क्रेडिट कार्ड का जाल तब बनता है, जब कोई व्यक्ति उन खरीदारी के लिए क्रेडिट कार्ड का उपयोग करता है, जिन्हें वह तुरंत वहन नहीं कर सकता और फिर हर महीने केवल न्यूनतम भुगतान ही करता है। इस आदत के कारण भुगतान का अधिकांश हिस्सा मूलधन कम करने के बजाय केवल ब्याज चुकाने में चला जाता है, जिससे समय के साथ कर्ज लगातार बढ़ता रहता है। यदि आप भी इस कर्ज के जाल में फंस गए हैं, तो आपको तुरंत इससे बाहर निकलने की दिशा में कदम उठाने चाहिए। क्या परिवार या दोस्त बन सकते हैं बिना ब्याज के सबसे सुरक्षित सहारा अगर कोई रिश्तेदार या मित्र आपको बिना ब्याज के आर्थिक मदद कर सकता है, तो बिना झिझक उसकी सहायता लें। यदि आप 50,000 रुपये किसी करीबी से लेकर क्रेडिट कार्ड का बिल भर देते हैं, तो करीब 48 फीसदी तक का भारी ब्याज बच सकता है। इसमें न कोई प्रोसेसिंग फीस लगती है और न ही आपके क्रेडिट स्कोर पर असर पड़ता है। हालांकि, लेन-देन की शर्तें लिखित रखें और तय समय पर पैसा लौटा दें। क्या महंगे कार्ड बकाये को सस्ती ईएमआई में बदलना बेहतर विकल्प है अगर निजी मदद न मिले, तो 36 से 48 फीसदी ब्याज वाले महंगे कर्ज को कम ब्याज वाले कर्ज से बदलना समझदारी हो सकती है। बैंक आपके क्रेडिट कार्ड बकाये को 12 से 18 फीसदी ब्याज वाली ईएमआई में बदल देते हैं। इसके अलावा 9.99 से 11 फीसदी ब्याज दर पर मिलने वाले पर्सनल लोन से आप पूरा कार्ड बिल एक बार में चुका सकते हैं और उसे निश्चित ईएमआई व तय समय-सीमा में निपटा सकते हैं। क्या बैलेंस ट्रांसफर हर किसी के लिए सही विकल्प है बैलेंस ट्रांसफर के तहत आप अपने एक कार्ड का बकाया सीमित समय के लिए कम ब्याज दर पर दूसरे कार्ड में ट्रांसफर कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि यह ऑफर अस्थायी होता है। प्रोमोशनल अवधि खत्म होते ही ब्याज दर फिर 36 से 48 फीसदी तक पहुंच जाती है। इसके अलावा 1 से 3 फीसदी प्रोसेसिंग फीस और उस पर 18 फीसदी जीएसटी भी देना पड़ता है। इसलिए इसका उपयोग तभी करें, जब आप 6 महीने या 1 साल के भीतर अधिकांश बकाया चुका सकें। क्या स्ट्रक्चर्ड सेटलमेंट आखिरी विकल्प होना चाहिए यदि आप ईएमआई चुकाने में भी असमर्थ हो चुके हैं और लगातार रिकवरी कॉल आ रहे हैं, तो बैंक से बातचीत कर एकमुश्त सेटलमेंट आखिरी रास्ता हो सकता है। इसमें बैंक आपकी कुल बकाया राशि का 40 से 70 फीसदी लेकर खाता बंद कर सकते हैं। फ्रीड जैसे प्लेटफॉर्म भी इस प्रक्रिया में मदद करते हैं। हालांकि, इसे केवल गंभीर वित्तीय संकट में अंतिम विकल्प के रूप में ही अपनाएं, क्योंकि इससे आपका क्रेडिट स्कोर लंबे समय तक प्रभावित हो सकता है। क्या समझदारी से किया गया क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल फायदे का सौदा है इसका जवाब देते हुएओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी मेंफाइनेंस केअसिस्टेंट प्रोफेसरकाशिफ अंसारी बताते हैं कियदि क्रेडिट कार्ड का उपयोग समझदारी से किया जाए, तो यह बेहतरीन रिवॉर्ड देता है और इसका कोई अतिरिक्त खर्च नहीं आता। लेकिन यदि पूरा बिल चुकाए बिना बकाया आगें बढ़ाया जाए, तो यह देश में उधार लेने के सबसे महंगे तरीकों में से एक बन जाता है। क्या करें स्टेटमेंट में दी गई पूरी राशि का भुगतान करें। शून्य ब्याज का लाभ लेने का यही एकमात्र तरीका है। यदि पूरा भुगतान संभव न हो, तो न्यूनतम बकाया से जितना अधिक हो सके उतना भुगतान करें। सबसे अधिक ब्याज दर वाले क्रेडिट कार्ड का भुगतान सबसे पहले करें। न्यूनतम राशि के बजाय पूरी राशि के भुगतान के लिए ऑटो-पे सेट करें। ये भी पढ़ें: Income Tax Return: ITR भरते समय भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, वरना घर पहुंच सकता है इनकम टैक्स नोटिस क्या बिल्कुल नहीं करना चाहिए न्यूनतम बकाया राशि को अपना लक्ष्य न मानें। इसे केवल खाते को सक्रिय रखने और बैंक का ब्याज जारी रखने के लिए कम रखा जाता है। क्रेडिट कार्ड से नकद राशि न निकालें, क्योंकि इसमें बिना किसी ग्रेस पीरियड के पहले दिन से ही ब्याज लगना शुरू हो जाता है। साथ ही अतिरिक्त शुल्क भी देना पड़ता है। पुरानी फिजूलखर्ची का भुगतान करने के लिए अपनी खर्च करने की आदतों में सुधार किए बिना नया कर्ज न लें। पहली मिस्ड पेमेंट को नजरअंदाज न करें, क्योंकि असली नुकसान की शुरुआत यहीं से होती है।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jul 27, 2026, 04:54 IST
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