Social Media Poetry: निरीह फूलों की खातिर

फूलों की हत्या करनी थी पानी देना कम कर देते पर निरीह फूलों की खातिर क्यों तलवार निकाली बाबा ! हमको कुछ बातें करनी हैं कब तुम होगे खाली बाबा ! माली बाबा ! माली बाबा ! सब के सब अचरज में डूबे तना फूल पत्ती जड़ कलियाँ लेकिन तुम से खामोशी से पूछ रही हर डाली बाबा हमको कुछ बातें करनी हैं कब तुम होगे खाली बाबा ! माली बाबा ! माली बाबा ! इन्सानों की तरह उम्र सारे रिश्तों की भी होती है हमने तुमसे तुमने हमसे क्यों उम्मीदें पाली बाबा हमको कुछ बातें करनी हैं कब तुम होगे खाली बाबा ! माली बाबा ! माली बाबा ! साभार: ज्ञानप्रकाश आकुल की फेसबुक वाल से हमारे यूट्यूब चैनल कोSubscribeकरें।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Apr 18, 2026, 20:03 IST
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