Bareilly News: गुरु का मार्गदर्शन बना ताकत, शिष्य ने राष्ट्रीय स्तर पर जीता स्वर्ण पदक
खिलाड़ी अल्तमश और कोच शाहिद ने गुरु-शिष्य की परंपरा को किया साकारबरेली। भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा को सदियों से विशेष स्थान प्राप्त है। यही परंपरा जब खेल मैदान में उतरती है, तो परिणाम सिर्फ पदक नहीं बल्कि एक प्रेरक मिसाल के रूप में सामने आता है। ऐसी ही एक कहानी जिले से निकलकर राष्ट्रीय मंच तक पहुंची है। एफआर इस्लामिया इंटर कॉलेज में शारीरिक शिक्षक के पद पर कार्यरत शाहिद रजा, हिमाचल प्रदेश में हुई राष्ट्रीय विद्यालयीय अंडर-14 वॉलीबॉल प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश टीम के कोच भी रहे, और उनके शिष्य अल्तमश मंसूरी ने भी प्रतियोगिता में प्रदेश की टीम से खेलते हुए स्वर्ण पदक जीतकर, इस परंपरा को साबित किया।महज 13 वर्ष के अल्तमश मंसूरी एफआर इस्लामिया इंटर कॉलेज में कक्षा आठ के छात्र हैं। एयरफोर्स के पास रहने वाले अल्तमश ने पूरे टूर्नामेंट में काउंटर अटैकर की अहम जिम्मेदारी निभाई। तेज स्पाइक, सटीक मूवमेंट और दबाव में संतुलित प्रदर्शन के चलते वे टीम की स्वर्णिम जीत के प्रमुख स्तंभ बने। कोच शाहिद रजा बताते हैं कि अल्तमश पिछले तीन वर्षों से नियमित और अनुशासित ढंग से प्रशिक्षण ले रहे हैं। वे अभ्यास के प्रति बेहद समर्पित हैं और हर मैच को सीखने का अवसर मानते हैं।कोच को देते हैं सफलता का श्रेयअल्तमश अपनी सफलता का श्रेय अपने गुरु शाहिद रजा को देते हैं। उनका कहना है कि शाहिद सर के मार्गदर्शन के बिना यह उपलब्धि संभव नहीं थी। वे न केवल तकनीकी बारीकियां सिखाते हैं, बल्कि मानसिक रूप से भी मजबूत बनाते हैं। शाहिद रजा के लिए यह उपलब्धि भावनात्मक रूप से भी खास रही। वे बताते हैं कि एक समय ऐसा था जब वे स्वयं खिलाड़ी के रूप में नॉर्थ जोन प्रतियोगिता के लिए हिमाचल प्रदेश गए थे। अब वहीं पर अपने शिष्य को राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतते देखना एक गुरु के लिए गर्व और संतोष का क्षण है। संवाद
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 15, 2026, 02:59 IST
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