Chamba News: निर्धारित मंजिल से पहले हांफी सरकारी बस, खटारा सिस्टम ने फिर तोड़ा यात्रियों का भरोसा
चंबा। दिन :शनिवार, समय : 4:30 बजे शाम, रजेरा के पास चंबा–बोगा–बाड़का रूट पर की सरकारी बस की जर्जर हालत एक बार फिर यात्रियों पर भारी पड़ी। बस रजेरा के पास अचानक चलते-चलते खराब हो गई। बस में करीब 35 यात्री सवार थे, जिनमें स्कूली बच्चे भी शामिल थे, सर्द मौसम में सड़क किनारे फंस गए। यात्रियों ने करीब आधा घंटा बस के दोबारा चलने का इंतजार किया लेकिन जब कोई समाधान नहीं निकला तो उन्हें मजबूरी में आठ किलोमीटर पैदल चलकर और टैक्सी का सहारा लेकर अपने घर पहुंचना पड़ा। कई यात्री अंधेरा होने के बाद घर पहुंचे।बस दोपहर बाद 3:15 बजे चंबा बस स्टैंड से रवाना हुई थी। इस बस को शाम 5:40 बजे चंबा से दोबारा रूट पर रवाना होना था लेकिन बीच रास्ते में खराब होने के कारण बस वापस नहीं पहुंच सकी। नतीजतन, चंबा बस स्टैंड पर भी यात्री देर शाम तक बस का इंतजार करते रहे। ठंड में ठिठुरते यात्री घंटों बस स्टैंड में खड़े रहे, जब बस खराब होने की सूचना मिली तो यात्री निजी वाहनों से अपने घरों तक पहुंचे। दिसंबर माह में चंबा-लढान, चंबा-भड़ेला, चंबा-हिमगिरी, चंबा- शिमला, चंबा-देहरादून, चंबा-पठानकोट, चंबा-चंडीगढ़, चंबा-सनवाल, चंबा-भंजराडू रूट पर बसें खराब हो चुकी हैं। एचआरटीसी के डीडीएम शुगल सिंह का कहना है कि बस में तकनीकी खराबी के कारण ऐसी समस्या उत्पन्न हुई थी। मेकेनिक को भेजकर बस की मरम्मत करवाकर उसे दोबारा रूट पर भेजा जाएगा।इस रूट पर बस की हालत बेहद खराब है। सप्ताह में केवल तीन दिन ही बस अपने निर्धारित स्थान तक पहुंच पाती है जबकि बाकी दिनों में आधे रास्ते में ही खराब हो जाती है। खटारा बस ही बार-बार इस रूट पर भेजी जाती है, जिससे यात्रियों की जान जोखिम में रहती है। -विकास ठाकुर, विद्यार्थीयह कोई पहली बार नहीं है। हर हफ्ते बस बीच रास्ते में खराब हो जाती है। बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है लेकिन सुनने वाला कोई नहीं। अब तो सरकारी बस में सफर करने में डर लगता है। एकमात्र बस से जाना मजबूरी है। -कंचना देवी, यात्रीकई बार जब बस खराब हो जाती है तो धुलाड़ा वाली बस में सवारियों को बैठा दिया जाता है जिसमें सवारियां काफी हो जाती हैं और बस देरी से निर्धारित स्थान तक पहुंचती है। जिस कारण अंधेरा हो जाता है। -स्नेहा कुमारी, विद्यार्थीजहां तक बस जाती है, उसके आगे पैदल चलना पड़ता है। ऐसे में बस आधे रास्ते ही हांफ जाती है। जिसके बाद घर पहुंचते अंधेरा हो जाता है। पहले ही क्षेत्र में जंगली भालू का आतंक है। खटारा बस को रूट पर न भेजा जाए। -अमित कुमार, विद्यार्थी चंबा- बोगा- बाड़का बस खराबहोने के बाददूसरीबस इंतजार करते यात्री:- फोटो : 1
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Dec 20, 2025, 23:47 IST
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