गोपाल सिंह नेपाली: दूर जाकर न कोई बिसारा करे, मन दुबारा-तिबारा पुकारा करे

दूर जाकर न कोई बिसारा करे, मन दुबारा-तिबारा पुकारा करे, यूँ बिछड़ कर न रतियाँ गुज़ारा करे, मन दुबारा-तिबारा पुकारा करे। मन मिला तो जवानी रसम तोड़ दे, प्यार निभता न हो तो डगर छोड़ दे, दर्द देकर न कोई बिसारा करे, मन दुबारा-तिबारा पुकारा करे। खिल रही कलियाँ आप भी आइए, बोलिए या न बोले चले जाइए, मुस्कुराकर न कोई किनारा करे, मन दुबारा-तिबारा पुकारा करे। चाँद-सा हुस्न है तो गगन में बसे, फूल-सा रंग है तो चमन में हँसे, चैन चोरी न कोई हमारा करे, मन दुबारा-तिबारा पुकारा करे। हमें तकें न किसी की नयन खिड़कियाँ, तीर-तेवर सहें न सुनें झिड़कियाँ, कनखियों से न कोई निहारा करे, मन दुबारा-तिबारा पुकारा करे। लाख मुखड़े मिले और मेला लगा, रूप जिसका जँचा वो अकेला लगा, रूप ऐसे न कोई सँवारा करे, मन दुबारा-तिबारा पुकारा करे। रूप चाहे पहन नौलखा हार ले, अंग भर में सजा रेशमी तार ले, फूल से लट न कोई सँवारा करे, मन दुबारा-तिबारा पुकारा करे। पग महावर लगाकर नवेली रंगे, या कि मेंहदी रचाकर हथेली रंगे, अंग भर में न मेंहदी उभारा करे, मन दुबारा-तिबारा पुकारा करे। आप पर्दा करें तो किए जाइए, साथ अपनी बहारें लिए जाइए, रोज़ घूँघट न कोई उतारा करे, मन दुबारा-तिबारा पुकारा करे। एक दिन क्या मिले मन उड़ा ले गए, मुफ़्त में उम्र भर की जलन दे गए, बात हमसे न कोई दुबारा करे, मन दुबारा-तिबारा पुकारा करे। हमारे यूट्यूब चैनल कोSubscribeकरें।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 21, 2026, 10:44 IST
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