बार-बार की आग: जलती इमारतें और सोता सिस्टम, कब सुधरेगी लापरवाही वाली व्यवस्था
देश के अलग-अलग हिस्सों से हाल के दिनों में आग लगने की जो घटनाएं सामने आई हैं-कटक के एक अस्पताल में भीषण आग, दिल्ली के पालम इलाके में हादसा और इंदौर में ईवी चार्जिंग के दौरान लगी आग, वे दिल को दहलाने वाली तो हैं ही, साथ ही, ये गंभीर लापरवाही, सुरक्षा मानकों की उपेक्षा और प्रशासनिक उदासीनता के एक व्यापक व चिंताजनक पैटर्न की ओर भी इशारा करती हैं। जब जानें चली जाती हैं, परिवार बिखर जाते हैं और संपत्ति की तबाही होती है, तब समाज व व्यवस्था की जड़ता फौरी तौर पर जरूर टूटती है, लेकिन ज्यादा विस्मयकारी यह है कि गाहे-बगाहे देश में ऐसे हादसे होते रहने के बावजूद इसकी कतई गारंटी नहीं है कि हम अब भी जागेंगे या फिर अगली दुर्घटना का इंतजार करेंगे ओडिशा में कटक के एक सरकारी अस्पताल के सघन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) में लगी आग इसलिए अधिक खलने वाली है, क्योंकि मुख्यमंत्री ने कुछ ही महीने पहले राज्य के सभी चिकित्सा संस्थानों को अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की जांच करने का निर्देश दिया था। यह कोई अकेली घटना नहीं है, पिछले वर्ष अक्तूबर में राजस्थान के एक अस्पताल के आईसीयू में आग लगी थी। 2024 में उत्तर प्रदेश के झांसी में एक अस्पताल के आईसीयू में लगी आग से झुलसे नवजातों को कौन भूल सकता है। क्या यह उदास और शर्मिंदा करने वाली बात नहीं है कि कटक में हुए हादसे में, जिसमें आईसीयू में भर्ती 23 में से 12 मरीजों की मौत हुई, अस्पताल की दमकल टीम देर से तो पहुंची ही, वह अग्निशमन तंत्र को चालू तक नहीं कर पा रही थी दिल्ली के पालम इलाके की घटना भी इसी पैटर्न को दोहराती है। रिहायशी इमारत में लगी आग राजधानी में अनियोजित विकास के अलावा घनी आबादी वाले क्षेत्रों में आपातकालीन सेवाओं के संचालन में अक्षमता की देन कही जा सकती है। इंदौर में ईवी चार्जिंग के दौरान लगी आग एक नए खतरे की ओर संकेत करती है। देश में इलेक्ट्रिक वाहन तेजी से बढ़ रहे हैं, जो पर्यावरण के लिहाज से एक सकारात्मक कदम है। लेकिन, चार्जिंग तंत्र में आग लगने के जोखिम को देखते हुए और खासकर ऐसे हादसों के बाद इसकी पूरी आशंका है कि जो लोग इलेक्ट्रिक वाहन की ओर रुख करने की सोच रहे होंगे, वे अपने फैसले पर पुनर्विचार करने लगें। तात्कालिक वजहें जो भी हों, लेकिन इन तीनों हादसों के केंद्र में, व्यक्तिगत और व्यवस्थागत, दोनों स्तरों पर एक किस्म की लापरवाही तो दिखती ही है। जब तक यह रवैया दूर नहीं होता और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था के मानकों पर पड़ी धूल नहीं छंटती, तब तक कोई भी सुरक्षित नहीं है।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Mar 20, 2026, 05:23 IST
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