Bareilly News: बुलावे पर बाढ़ खंड पहुंचे किसान, अभियंता का चार घंटे इंतजार कर बैरंग लौटे

बरेली। 14 साल पहले वर्ष 2011-12 में रामगंगा नदी किनारे गौटिया मोहर सिंह तटबंध बनने में सैकड़ों किसानों की खेती तटबंध में चली गई, लेकिन अधिकांश किसान आज भी मुआवजे से वंचित हैं। सोमवार को बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता के बुलावे पर किराया-भाड़ा खर्च कर कार्यालय भी पहुंचे, लेकिन खुद अभियंता गायब रहे। चार घंटे इंतजार के बाद किसान मायूस होकर लौट गए।दोपहर डेढ़ बजे सिंचाई विभाग के बाढ़खंड कार्यालय के बाहर दो दर्जन से अधिक किसान मौजूद थे। इन लोगों ने बताया कि उन्हें अधिशासी अभियंता ने समस्या सुनने के लिए बुलाया था, लेकिन अभियंता कार्यालय में नहीं हैं। बताया कि वह लोग सुबह 11 बजे कार्यालय आ गए थे। फिर अपराह्न तीन बजे तक उन लोगों ने अभियंता के आने का इंतजार किया और फिर निराश होकर बैरंग लौट गए। किसानों ने बताया कि उनकी खेती तटबंध बनने के दौरान अधिग्रहित हुई थी। जमीन अधिग्रहित होने के बाद 14 साल बीत गए, पर उन्हें मुआवजा नहीं मिला है। किसानों ने बताया कि यह तटबंध 16 किमी लंबा है, जो आंवला-मीरगंज तहसील क्षेत्र के हाजीपुर से बालकिशनपुर तक बना है। संवाद-------किसान बोले भाड़ा भी गया, उम्मीद भी टूटीमीरगंज क्षेत्र के अंबरपुर के सियाराम ने बताया कि उनकी चार बीघे खेती थी, जो तटबंध में चली गई उसके बाद से मजदूरी कर बच्चों को पाल रहे हैं। पहले भी वह दो बार बाढ़ खंड आ चुके हैं। ओमप्रकाश, शोभाराम ने भी यही बात दोहराई। यह लोग भी भूमिहीन हैं, मजदूरी करते हैं। बताया कि 150 रुपये भाड़ा खर्च कर अभियंता से मिलने आए थे। माखनलाल भी चार बीघे जमीन अधिग्रहीत होने बाद मुआवजा के चक्कर में चौथी बार बाढ़ खंड कार्यालय आए थे। हरियाणा से आए सरदार जीत सिंह ने बताया कि उनकी जमीन आंवला तहसील के रोहतापुर में थी, जो तटबंध में चली गई थी। मुआवजा के लिए बाढ़खंड कार्यालय में पांच-छह बार आ चुके हैं। -----राजीव ने छोड़ दी मुआवजा की आसरामनगर के राजीव यादव ने बताया कि उनकी खेती मीरगंज के जैतपुरा में थी, साढ़े चार बीघे खेती तटबंध में चली गई। मुआवजा नहीं मिला तो हाईकोर्ट गए थे, जहां से फैसला उनके पक्ष में आया, लेकिन, सिंचाई विभाग ने उन्हें मुआवजा नहीं दिया। परेशान होकर मुआवजा की उम्मीद छोड़ दी है, लेकिन अभियंता के बुलावे पर सोमवार को फिर आए पर नतीजा शून्य ही रहा है।--किसानों के मुआवजा बकाया होने के बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है। सोमवार को किसानों को बुलाया था, लेकिन जरूरी शासकीय कार्य से जिले से बाहर आया हुआ हूं। सहायक अभियंता अमित कुमार ने किसानों की समस्या सुन ली है, अब किसानों के प्रार्थना पत्र के आधार पर अगली कार्रवाई करेंगे। - नीरज कुमार लांबा, अधिशासी अभियंता-बाढ़खंड

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Dec 23, 2025, 03:00 IST
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