यमुना बाजार अतिक्रमण: नदी किनारे रहने वालों का फूटा दर्द, बोले- सात पीढ़ियां इस जगह रहीं, अब यहां से कहां जाएं
यमुना बाजार पर अतिक्रमण हटानेकी तलवार लटकने के बाद स्थानीय लोगों में गम और डर का माहौल है। पुरखों का बनाया और संवारा आशियाना उजड़ने की कगार पर है। आंसुओं से भरी आंखों में एक ही सवाल है कि सरकारी फरमान के बाद अब 310 परिवार आखिर कहां जाएंगे। बुधवार को स्थानीय निवासियों ने अपना दर्द बयां किया कि सात पुश्तों से यहीं रह रहें हैं। यमुना की गोद में पले बढ़े हैं। पुरखों ने जिसे बनाया और नई पीढ़ी ने संवारा अब वही आशियाना जमींदोज होने वाला है। यमुना किनारे रहने वाले लोगों को आम लोगों की तरह ही सारी सुविधाएं मिल रही हैं। उनके घरों में बिजली की भी सप्लाई हो रही है। साथ ही, पूरे कॉलोनी में सीसीटीवी कैमरे भी लगे हुए हैं। स्थानीय निवासियों ने बताया कि पहले यमुना इतनी साफ थी, कि हमारी पुरानी पीढ़ी यमुना के जल से खाना बनाते थे। लेकिन अब यमुना में सीवर का पानी और फैक्ट्रियों का केमिकल मिलने के बाद से यमुना दूषित हो गई हैं। यमुना नहीं हुई साफ, तो लोगों का घर उजाड़ रहे स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सरकार मैली यमुना को साफ नहीं कर पा रही है। इसलिए गरीब और निर्धन लोगों का घर उजाड़ रही है। दावा है कि यमुना इसलिए गंदी नहीं हो रही है कि यहां आसपास लोग निवास करते हैं, बल्कि पूरे दिल्ली का गंदा पानी, सीवर और फैक्ट्रियों से निकलने वाले हानिकारक केमिकल मिलते हैं। इस वजह से यमुना मैली और प्रदूषित हो गई है। रोजगार भी छिन जाएगा स्थानीय निवासियों का कहना है कि सरकार की ओर जारी 15 दिन के नोटिस से सिर्फ उनका आशियाना ही नहीं, बल्कि 310 परिवार का यमुना से जुड़े रोजगार भी छीन जाएगा। ऐसे में इन परिवार को पास बेरोजगारी की समस्याएं भी उत्पन्न हो जाएगी। उनके बच्चों की पढाई-लिखाई सब कुछ छूट जाएगी। यहां तक कि उनके के पास खाने-पीने की चीजों का भी संकट आ जाएगा। ब्रिटिश काल से निवास कर रहे निवासी स्थानीय निवासियों ने बताया कि वह यहां यमुना घाट के पास ब्रिटिश काल से निवास कर रहे हैं। इस पूरे काल में कभी उन्हें जगह खाली करने का कोई नोटिस जारी नहीं हुआ है। अब अचानक से उन्हें घर और यमुना घाट को छोड़कर जाने को कहा जा रहा है। कई संप्रदाय के लोग करते हैं निवास स्थानीय निवासियों ने बताया कि यमुना घाट के पास सिर्फ ब्राह्मण ही नहीं रहते हैं, बल्कि यहां नाई, मल्लाह और माली समाज के लोग भी रहते हैं। सभी पूजा पाठ में भागीदारी निभाते हैं। उनका यमुना से रोजगार जुड़ा है। ध्वस्तीकरण से सभी लोग प्रवासी हो जाएंगे और रोजी-रोटी छिन जाएगी। लोगों ने कहा सरकार के इस नोटिस के खिलाफ हम लोग अदालत तक जाएंगे और अपनी बात रखेंगे। सरकार जबरन हम लोगों से घर खाली करवा रही है। -सुनील शर्मा, कोषाध्यक्ष, यमुना घाट पंडा एसोसिएशन हम लोगों की कई पीढ़ी गुजर चुकी है। उन्होंने यमुना किनारे जन्म लिया और यमुना किनारे ही समा गए। अब हम लोग कहां जाएंगे। -शशि शर्मा, निवासी हमरी पुश्तें यहां अंग्रेजों के जमाने से रह रही हैं। हमार जन्म प्रमाण पत्र से लेकर वोटर कार्ड तक सब कुछ इसी पते पर बना हुआ है। -संतोष शर्मा, निवासी हमारे बच्चों की पढ़ाई, परिवार का रोजगार और पूरा जीवन इसी इलाके से जुड़ा है। हमारे बुजुर्गों ने भी इसी घाट पर पूजा पाठ और धार्मिक कार्य की हैं। -बहादुर, निवासी
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- Source: www.amarujala.com
- Published: May 08, 2026, 01:43 IST
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