Chandigarh News: विशेषज्ञ बोले- वेनेजुएला का पतन भारत के लिए चेतावनी

-कर्नल मुख्तियार सिंह कुलार और कैप्टन राजिंदर सिंह लिट्ट का दावा- चीन, क्यूबा और भारत अंधेरे में रहे-क्या रूस को पहले से थी अमेरिकी हमले की जानकारी रूस ने दो हफ्ते पहले निकाले अपने लोग---कंवरपालहलवारा। वेनेजुएला पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भारतीय सेना के सेवानिवृत्त कर्नल मुख्तियार सिंह कुलार और कैप्टन राजिंदर सिंह लिट्ट ने विशेष बातचीत में दावा किया कि रूस को इस हमले की पहले से जानकारी थी जबकि भारत, चीन और क्यूबा पूरी तरह अनजान रहे।उन्होंने बताया कि अमेरिकी कार्रवाई से करीब 14 दिन पहले रूस ने वेनेजुएला से अपने राजनयिकों के परिवारों को सुरक्षित निकाल लिया था। 20 दिसंबर तक रूसी राजनयिकों की पत्नियां और बच्चे स्वदेश लौट चुके थे। इसके विपरीत, हमले के बाद भारत को अपने नागरिकों के लिए आनन-फानन में ट्रैवल एडवाइजरी जारी करनी पड़ी।30 मिनट में खत्म हुआ ऑपरेशन3 जनवरी को अमेरिकी डेल्टा फोर्स ने वेनेजुएला में कार्रवाई कर मादुरो और उनकी पत्नी को हिरासत में ले लिया। महज 30 मिनट के इस ऑपरेशन में पूरा घटनाक्रम समाप्त हो गया। सेवानिवृत्त अधिकारियों का कहना है कि इसे महज संयोग नहीं माना जा सकता। हमले के बाद रूस ने सार्वजनिक रूप से अमेरिकी कार्रवाई की निंदा की और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने की मांग की, लेकिन सवाल यह है कि जब खतरे की भनक तक न हो, तो कोई देश दो सप्ताह पहले अपने नागरिक क्यों निकालेगा। इससे यह आशंका गहराती है कि या तो अमेरिका ने रूस को पहले से सूचना दी या फिर रूसी खुफिया तंत्र अमेरिकी एजेंसियों से भी आगे है।धरी रह गई रूसी वायु रक्षा प्रणालीकर्नल कुलार और कैप्टन लिट्ट ने सबसे चौंकाने वाला पहलू वेनेजुएला की सुरक्षा व्यवस्था को बताया। वेनेजुएला ने रूस से करीब दो अरब डॉलर की लागत से एस-300 वायु रक्षा प्रणाली खरीदी थी, जो कागजों पर पूरे कैरिबियन क्षेत्र को नो-फ्लाई जोन बनाने में सक्षम थी। ये प्रणालियां 250 किलोमीटर दूर से मिसाइलों को मार गिराने का दावा करती हैं, लेकिन अमेरिकी सेना ने 20 मिनट से भी कम समय में इन्हें निष्क्रिय कर दिया।क्यूबा और चीन भी रहे अनजानवेनेजुएला के करीबी सहयोगी क्यूबा और चीन भी हमले से पहले कोई निकासी नहीं कर सके। क्यूबा के डॉक्टर अब भी वहां फंसे हैं और उनके परिवार चिंता में हैं। चीन ने भी केवल घटना के बाद औपचारिक निंदा तक खुद को सीमित रखा।सबक भारत के लिएसेवानिवृत्त अधिकारियों के अनुसार, वेनेजुएला का पतन भारत के लिए एक स्पष्ट चेतावनी है। किसी देश का पतन रातोंरात नहीं होता। मुफ्त सुविधाओं पर अत्यधिक निर्भरता, वित्तीय अनुशासन की अनदेखी, संस्थानों का कमजोर होना और जवाबदेही की जगह वफादारी को तरजीह देना किसी भी समाज को अंदर से खोखला कर देता है।वेनेजुएला क्यों टूटाकभी लैटिन अमेरिका की सबसे समृद्ध अर्थव्यवस्थाओं में शामिल था। सस्ता ईंधन, मुफ्त पैसा और गारंटीशुदा आय ने कामकाजी संस्कृति को कमजोर किया। उद्योग, रोजगार और उत्पादकता की जगह फ्रीबीज को बढ़ावा दिया गया। आर्थिक विकृति और संस्थागत क्षरण होने लगा। कर्नल कुलार और कैप्टन लिट्ट ने आगाह किया कि भारत में भी मुफ्त सुविधाओं की राजनीति के बजाय रोजगार, उत्पादन और मजबूत संस्थानों पर जोर देना होगा। वेनेजुएला केवल एक देश की कहानी नहीं, बल्कि भविष्य के लिए चेतावनी देने वाला दर्पण है।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 08, 2026, 18:59 IST
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