Bareilly News: उम्र के 85 पड़ाव पार... दीदी बांट रहीं ज्ञान का उपहार, शिक्षा के प्रति समर्पित किया पूरा जीवन

मन में कुछ करने की इच्छा हो तो उम्र बाधा नहीं बनती है। बरेली के सिविल लाइंस निवासी शिक्षाविद् डॉ. सरोज मार्कंडेय उम्र के 85वें पड़ाव पर भी अपने अनुभव से ज्ञान का उजियारा फैला रही हैं। उन्होंने अपना पूरी जीवन ही शिक्षा के प्रति समर्पित कर दिया। लोग उन्हें दीदी के नाम से पुकारते हैं। पीलीभीत में 10 जुलाई 1939 को दीदी का जन्म हुआ तो उस दौर में महिला शिक्षा का चलन कम था। दीदी ने इस मिथक को तोड़ते हुए हाईस्कूल की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। सात वर्ष बाद जिले का कोई विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में पास हुआ तो खूब बधाइयां मिलीं। दीदी ने बरेली से हिंदी व अंग्रेजी में एमए और डबल पीएचडी की। शिक्षा के प्रति लगाव की वजह से अविवाहित रहीं। पिता रामनाथ मार्कंडेय रेलवे में नौकरी करते थे। माता ज्ञान देवी गृहिणी थीं। दीदी आठ-भाई बहनों में सबसे बड़ी हैं। उन्होंने 16 विद्यार्थियों को हिंदी में पीएचडी कराई। इनके पसंदीदा कवि निराला और लेखक जय शंकर प्रसाद हैं। कमजोर विद्यार्थियों की बनीं मददगार दीदी ने नौकरी के दौरान कई छात्राओं की आर्थिक मदद भी की। बताया कि एक बार कोटद्वार की एक मुस्लिम लड़की की पढ़ाई आर्थिक तंगी की वजह से रुक गई। उन्होंने मदद कर उसकी बीए सेकेंड ईयर की पढ़ाई पूरी कराई। सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली पेंशन से भी वह छात्राओं की मदद करती रहती हैं।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jul 10, 2025, 12:57 IST
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