आर्थिक सर्वेक्षण में खुलासा: खनिज निधि का 65 फीसदी पैसा खर्च नहीं, 177 करोड़ में से सिर्फ 62 करोड़ का खर्च
हरियाणा में खनन प्रभावित इलाकों के विकास के लिए बनाई गई जिला खनिज निधि (डीएमएफ) का बड़ा हिस्सा अब तक खर्च नहीं हो सका है। केंद्रीय सरकार की ओर से संशोधित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत खनन प्रभावित जिलों में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को लागू करने के लिए यह निधि गठित की गई थी। दो मार्च को जारी राज्य के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार खनिज निधि के पास कुल 177.41 करोड़ रुपये जमा था, इनमें सिर्फ 62.12 करोड़ रुपये ही खर्च किया जा सका है। यानी लगभग 65 फीसदी राशि अभी खातों में पड़ी है। रेवाड़ी, हिसार, अंबाला व पलवल में तो एक भी पैसा खर्च नहीं किया जा सका। हरियाणा सरकार के नियमानुसार जो खदानें चल रही हैं, उन्हें अपनी कमाई का 7.5 प्रतिशत पैसा खान एवं खनिज पुर्नस्थापन और पुर्नवास फंड में जमा करवाना होता है। यह फंड खनन से हुए नुकसान की भरपाई और लोगों के पुनर्वास के लिए बनाया गया है। इसके अलावा, सरकार भी अपनी कमाई (जैसे रॉयल्टी और अन्य शुल्क) का 2.5 प्रतिशत हिस्सा इस फंड में डालती है। इस फंड का पैसा उन लोगों और इलाकों की मदद के लिए खर्च किया जाता है, जो खनन की वजह से प्रभावित होते हैं। इसका मुख्य मकसद खनन व उसके बाद खनन के आसपास के लोगों पर पड़ने असर को कम करना था। लोगों को शुद्ध पेयजल, स्वास्थ्य सुविधाएं, पुनर्वास व रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाने थे। प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के तहत यह काम जिला स्तर पर उपायुक्त की अध्यक्षता में किए जाते हैं। जिला जमा खर्च प्रतिशत में खर्च पंचकूला 9 करोड़ 13 लाख 62 हजार एक करोड़ 21 लाख 41 हजार 13.29 फीसदी सोनीपत दो करोड़ 19 लाख 74 हजार एक करोड़ 40 लाख 94 हजार 64.15 फीसदी यमुनानगर 27 करोड़ 64 लाख 53 हजार 17 करोड़ 51 लाख 56 हजार 63.36 फीसदी करनाल पांच करोड़ 61 लाख 72 हजार दो करोड़ 4 लाख 71 हजार 36.45 फीसदी भिवानी 24 करोड़ 16 लाख 12 हजार 10 लाख 20 हजार 0.42 फीसदी महेंद्रगढ़ 29 करोड़ 64 लाख 43 हजार 10 करोड़ 89 हजार 33.76 फीसदी दादरी 78 करोड़ 69 लाख 70 हजार 29 करोड़ 42 लाख 20 हजार 37.86 फीसदी रेवाड़ी छह लाख 26 हजार 00 हिसार आठ लाख 94 हजार 00 अंबाला 10 हजार सात 50 रुपये 00 पलवल छह लाख 18 हजार 00 अवैध खनन के हर रोज 5 से अधिक मामले आर्थिक सर्वे के मुताबिक 2020-21 से अक्तूबर 2025-26 तक कुल 10,491 अवैध खनन के मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें प्रतिदिन औसतन 5 से अधिक मामले सामने आए हैं। इन मामलों पर 161.40 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जो लगभग 8 लाख रुपये प्रति दिन के हिसाब से है। इसके अलावा, 28 अगस्त 2019 से अब तक 16,105 वाहनों को जब्त किया गया है और 198.76 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया है। राज्य सरकार अवैध खनन पर नियंत्रण के लिए कई कदम उठा रही है, जिनमें ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल और अन्य निगरानी उपाय शामिल हैं। इसके बावजूद, हरियाणा सरकार को खनिज राजस्व में एक सकारात्मक वृद्धि का अनुभव हुआ है। 2025-26 में राज्य का खनिज राजस्व 900.86 करोड़ तक पहुंच गया है, जो राज्य की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने की दिशा में एक अच्छा संकेत है। तेजी से बढ़ती हरियाणा की अर्थव्यवस्था हरियाणा का अर्थ एवं सांख्यिकी विभाग हर साल राज्य की कुल आय यानी सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का अनुमान जारी करता है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 में राज्य की अर्थव्यवस्था और मजबूत होने वाली है। अग्रिम अनुमान बताते हैं कि चालू कीमतों पर 2025-26 में हरियाणा का जीएसडीपी लगभग 13,67,768.78 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। यह पिछले साल 2024-25 की 11.3 प्रतिशत वृद्धि से ज्यादा, यानी 11.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दिखाता है। 2011-12 की स्थिर कीमतों के आधार पर देखें तो 2025-26 में राज्य का जीएसडीपी 7,58,504.67 करोड़ रुपये रहने की संभावना है। यह भी पिछले साल की 7.5 प्रतिशत वृद्धि की तुलना में ज्यादा, यानी 9.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। सीधे शब्दों में कहें तो हरियाणा की अर्थव्यवस्था पिछले साल की तुलना में इस साल ज्यादा तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Mar 04, 2026, 15:22 IST
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