Delhi: 'गर्भपात के लिए पति की सहमति अनिवार्य नहीं...', वैवाहिक कलह के एक मामले में हाईकोर्ट की टिप्पणी

दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि यदि कोई महिला गर्भधारण जारी नहीं रखना चाहती तो उसे मजबूर करना उसकी शारीरिक अखंडता (बॉडिली इंटेग्रिटी) का उल्लंघन है और इससे उसका मानसिक आघात बढ़ता है। न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने वैवाहिक कलह के मामले में 14 सप्ताह के भ्रूण का चिकित्सकीय गर्भपात कराने वाली अलग रह रही पत्नी को भारतीय दंड संहिता की धारा 312 (गर्भपात कराना) के तहत दर्ज आपराधिक मामले से मुक्त कर दिया।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 09, 2026, 10:04 IST
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