गूगल को झटका: विज्ञापनों में नहीं चलेगा दूसरों के ट्रेडमार्क का खेल, हाईकोर्ट ने लगाया 30 लाख का हर्जाना
दिल्ली हाईकोर्ट के एक हालिया फैसले को किसी कंपनी के ट्रेडमार्क का दुरुपयोग रोकने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दरअसल, हाईकोर्ट ने सैनिटरीवेयर कंपनी हिंदवेयर को बड़ी राहत देते हुए कहा कि गूगल किसी एक कंपनी के विज्ञापन में किसी दूसरी कंपनी के ट्रेडमार्क का इस्तेमाल नहीं कर सकता है। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि गूगल केवल एक इंटरमीडियरी नहीं है बल्कि विज्ञापन प्रणाली में सक्रिय भूमिका निभाता है। अदालत ने इस मामले में गूगल पर 30 लाख रुपये का हर्जाना भरने का आदेश भी सुनाया है। जस्टिस मिनी पुष्करणा की एकल पीठ ने अपने फैसले में कहा कि गूगल की भूमिका केवल मंच उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह विज्ञापनदाताओं को कीवर्ड सुझाता है और विज्ञापनों की रैंकिंग निर्धारित करता है। फैसले से गूगल के गूगल एडवर्ड नामक कार्यक्रम के जरिये चल रहे कमाई के खेल पर रोक लगाई जा सकेगी। ब्यूरो की-वर्ड का खेलट्रेडमार्क का दुरुपयोग जैसा जस्टिस पुष्करणा ने अपने फैसले में कहा, यदि कोई कंपनी किसी अन्य कंपनी का पंजीकृत ट्रेडमार्क गूगल एड्स पर कीवर्ड के रूप में खरीदती और उसके इस्तेमाल की वजह से खोज परिणामों में उसके विज्ञापन सबसे पहले प्रदर्शित होते हैं तो यह एक तरह का अपराध है। दरअसल, गूगल अपने विज्ञापनदाताओं को कुछ कीवर्ड सुझाता है, ताकि सर्च में उनके विज्ञापन पहले दिखाई दें। ऐसे कीवर्ड हो सकते हैं जो किसी दूसरी कंपनी का पंजीकृत ट्रेडमार्क हो। किसी कंपनी ने गूगल एडवर्ल्ड पर नोकिया या सोनी कीवर्ड खरीद लिया तो किसी उपयोगकर्ता के इन कीवर्ड के इस्तेमाल करने पर गूगल के विज्ञापनदाता के विज्ञापन पहले दिखाई देंगे। यह भी पढ़ें:बदलती यील्ड का खेल:डेट फंड की गिरती एनएवी का सच जानिए, बाजार के इस चक्रव्यूह में छुपा है कमाई का मौका! हिंदवेयर इसलिए पहुंचा कोर्ट 2013 की शुरुआत में हिंदवेयर लि. को पता चला कि उसकी प्रतिद्वंद्वी सैनिटरीवेयर कंपनियों, ग्रोहे इंडिया प्रा. लि. और सेरा सैनिटरीवेयर लि. ने गूगल एडवर्ड्स प्रोग्राम के माध्यम से हिंदवेयर ट्रेडमार्क को एक कीवर्ड के रूप में खरीद लिया था। नतीजतन, जब कोई उपभोक्ता गूगल सर्च इंजन पर हिंदवेयर शब्द खोजता था, तो सबसे पहला परिणाम सेरा की वेबसाइट का आता था। इसी तरह, जब कोई हिंदवेयर सैनिटरी या हिंदवेयर सैनिटरीवेयर खोजता था, तो सबसे पहला परिणाम ग्रोहे की वेबसाइट का आता था। हिंदवेयर ने कहा कि उसकी पूर्व सहमति के बिना इसका इस्तेमाल प्रतिद्वंद्वी कंपनी को आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। बाद में सेरा और ग्रोहे ने हिंदवेयर के साथ समझौता कर लिया। 2009 से ट्रेडमार्क कानूनों का उल्लंघन कर रहा गूगल मामले में सुनवाई के दौरान दलील दी गई कि हिंदवेयर एक पंजीकृत और लोकप्रिय ट्रेडमार्क है और कीवर्ड के रूप में इस ट्रेडमार्क का उपयोग ट्रेडमार्क अधिनियम की धारा 29(6) के तहत इसका दुरुपयोग है। क्योंकि किसी अन्य कंपनी का नाम पहले उपभोक्ता को भ्रमित करेगा और उसके संभावित ग्राहक को प्रतिद्वंद्वी ब्रांडों की ओर मोड़ देगा। गूगल 2009 तक भारत में कीवर्ड के रूप में ट्रेडमार्क के उपयोग की अनुमति नहीं देता था लेकिन 2009 के बाद नीति बदल गई। बचाव में दी दलील, विज्ञापन में नहीं दिखता ट्रेडमार्क गूगल ने अपने बचाव में कोर्ट में दलील दी कि सर्च इंजन पर खोज के दौरान कीवर्ड विज्ञापन दिखाने के लिए एक बैकएंड ट्रिगर के तौर पर कार्य करते हैं। चूंकि उपयोगकर्ता विज्ञापनदाता द्वारा प्रदान किए गए कीवर्ड नहीं देख सकते हैं, इसलिए ट्रेडमार्क का कीवर्ड के रूप में उपयोग ट्रेडमार्क अधिनियम के तहत उपयोग नहीं माना जा सकता है। हालांकि, कोर्ट ने यह दलील खारिज कर दी।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 01, 2026, 02:15 IST
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