कांग्रेस की हुंकार: यूपी में समझौते बगैर भी साथ आए अखिलेश, आप की गैरमौजूदगी; मुद्दे से अधिक सियासी मजबूरी अहम
राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को हुई वोट बचाओ, देश बचाओ रैली के जरिये कांग्रेस ने विपक्षी राजनीति के केंद्र में लौटने की कोशिश की। बाराखंभा से रामलीला मैदान तक निकले मार्च में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे के साथ समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी, नेशनल कॉन्फ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला, पीडीपी की महबूबा मुफ्ती और वामपंथी दलों के नेताओं की मौजूदगी ने इसे व्यापक विपक्षी प्रदर्शन का रूप दिया। आयोजकों के मुताबिक, रैली में 21 दलों ने शिरकत की। हालांकि, आम आदमी पार्टी (आप) और तमिलनाडु की सत्तारूढ़ डीएमके समेत कई अहम दल इससे दूर रहे। रैली का प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), कथित वोट चोरी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग रहा। कांग्रेस ने इसे महज चुनावी प्रक्रिया का विवाद नहीं, बल्कि संविधान, लोकतंत्र और नागरिकों के मताधिकार से जुड़ा सवाल बताया। विपक्षी दलों ने भी मतदाता सूची में बदलाव से बड़ी संख्या में मतदाताओं के प्रभावित होने की आशंका जताई। ऐसे में रैली से निकला सियासी संदेश आरोपों से आगे बढ़कर चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और भरोसा बहाल करने की मांग के रूप में सामने आया।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Nov 02, 2026, 08:46 IST
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