बदलती जीवनशैली से सेहत पर संकट: मानसिक रूप से भी हो रहे बीमार, विशेषज्ञों ने जताई चिंता, बोले- बनाएं संतुलन
तेजी से बदलती जीवनशैली और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के दौर में काम का अत्यधिक दबाव लोगों के लिए साइलेंट किलर साबित हो रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ता वर्क लोड न केवल मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है, बल्कि नींद की कमी, चिड़चिड़ापन और कई गंभीर बीमारियों का कारण भी बन रहा है। कार्यालयों में लंबे समय तक काम, डेडलाइन का दबाव और काम का जीवन संतुलन बिगड़ने से लोगों में तनाव, चिंता और अवसाद की शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं। मनोचिकित्सकों के अनुसार लगातार तनाव में रहने से व्यक्ति मानसिक रूप से थक जाता है, निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है और आत्मविश्वास में भी कमी आती है। नींद की कमी बढ़ा रही परेशानी मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान के मेडिकल डिप्टी सुपरिटेंडेंट डॉ ओमप्रकाश ने बताया कि काम के दबाव के सीधा असर नींद पर पड़ रहा है। देर रात तक काम करना, मोबाइल और लेपटॉप का अधिक उपयोग नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने कहा कि रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद न लेने से शरीर और दिमाग दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। डॉक्टरों के मुताबिक लंबे समय तक तनाव और नींद की कमी हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और मोटापे जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है। डॉक्टरों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि तनाव से बचने के लिए काम और निजी जीवन के बीज संतुलन बनाए रखना जरूरी है। नियमित व्यायाम, योग, ध्यान और पर्याप्त नींद तनाव को कम करने में सहायक हो सकते हैं। साथ ही, समय-समय पर ब्रेक लेना और अपनी समस्याओं को साझा करना भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Dec 30, 2025, 04:24 IST
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