Biz Updates: भारतीय निवेशक अब विदेशी बाजारों मे भी कर रहे निवेश; स्टॉक ब्रोकरों के नियमों की होगी समीक्षा
भारतीय निवेशक धीरे-धीरे और बुद्धिमान बनते जा रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, ये निवेशक अब केवल एक ही शेयर में निवेश करने के बजाय अमेरिकी शेयर बाजार, इंडेक्स और थीमेटिक ईटीएफ, निजी बाजार के अवसरों और वैश्विक फंडों में भी निवेश कर रहे हैं। वेस्टेड फाइनेंस की रिपोर्ट के अनुसार, यह पोर्टफोलियो निर्माण के अधिक सुनियोजित दृष्टिकोण और वैश्विक बाजार में भागीदारी को लेकर बढ़ती सहजता को दर्शाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, शोध, डिजिटल साधनों और शिक्षा तक पहुंच ने इस बदलाव को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। खासकर महानगरों से बाहर के शहरों में। रुपये की कीमतों में गिरावट ने वैश्विक निवेश को और भी प्रासंगिक बना दिया है। लगातार अवमूल्यन से दीर्घकालिक परिणाम ऐसे बदलते हैं जिन्हें अक्सर मुख्य आंकड़े पूरी तरह नहीं दर्शा पाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी इक्विटी और डेट में निवेश 2018-19 के 42.2 करोड़ डॉलर से चार गुना बढ़कर 2024-25 में 1.7 अरब डॉलर हो गया। म्यूचुअल फंड और स्टॉक ब्रोकरों के नियमों की होगी समीक्षा बाजार नियामक सेबी शेयर और म्यूचुअल फंड हाउस के ब्रोकरों के नियमों की समीक्षा करेगा। साथ ही, अनिवासी भारतीयों के लिए केवाईसी जरूरतों में ढील देने और क्लोजिंग ऑक्शन सत्र भी शुरू करने पर चर्चा होगी। बोर्ड की बुधवार को बैठक होगी। इसमें नियामक के चेयरमैन सहित उच्च अधिकारियों की संपत्तियों को सार्वजनिक करने पर भी विचार किया जाएगा। सेबी बोर्ड एक उच्च स्तरीय पैनल की रिपोर्ट पर विचार करेगा, जिसमें हितों के टकराव से बचने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की संपत्तियों के सार्वजनिक खुलासे की सिफारिश की गई है। बैठक में नियामक पैनल की रिपोर्ट पर चर्चा होगी। इसमें सेबी के शीर्ष अधिकारियों के हितों के टकराव को दूर करने के लिए अधिक खुलासे के जरिये पारदर्शिता लाने के लिए सुधारों का प्रस्ताव है। पैनल ने नवंबर में पांडे को रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में सुरक्षित व गुमनाम व्हिसलब्लोअर प्रणाली स्थापित करने, महंगे उपहारों पर प्रतिबंध लगाने और मुख्य आचार एवं अनुपालन अधिकारी का पद सृजित करने की भी सिफारिश है। म्यूचुअल फंड और स्टॉक ब्रोकर के नियमों के संबंध में पहले ही विनियमों पर परामर्श पत्र जारी किए गए थे। अक्तूबर में म्यूचुअल फंड नियमों में संशोधन के प्रस्ताव पर परामर्श पत्र जारी किया था। इसमें कुल खर्च अनुपात (टीईआर) की स्पष्ट परिभाषा व ब्रोकरेज शुल्कों पर संशोधित सीमाएं शामिल हैं। इनका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और गैर जरूरतों को कम करना और अनुपालन को आसान बनाना है। एजेंसी प्रस्तावित ढांचे के तहत सेबी ने परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी) की ओर से म्यूचुअल फंड योजनाओं पर लगने वाले अतिरिक्त खर्च 0.05 फीसदी को हटाने की योजना बनाई है। पहली बार 2012 में 0.20 फीसदी व 2018 में घटाकर 0.05 फीसदी कर दिया गया था। सेबी ने सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स, जीएसटी, कमोडिटी ट्रांजैक्शन टैक्स और स्टांप ड्यूटी जैसे सभी करों को टीईआर से बाहर रखने का सुझाव दिया है। साथ ही ब्रोकरेज, एक्सचेंज और नियामक शुल्कों के लिए वर्तमान में मंजूर खर्चों को भी शामिल करने की बात कही है। स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा सहित अन्य क्षेत्रों के एआई केंद्रों को 80 लाख डॉलर की वित्तीय सहायता देगा गूगल गूगल ने भारत के स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और सस्टेनेबल शहरों के लिए बने एआई उत्कृष्टता केंद्रों को 80 लाख डॉलर की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की है। साथ ही, स्वास्थ्य फाउंडेशन मॉडल के विकास में सहयोग के लिए 4 लाख डॉलर देगा। भारतीय भाषाओं के समाधान प्रदान करने वाले मॉडल बनाने के लिए ग्नानी.एआई, कोरोवर.एआई व भारतजेन को 50,000 डॉलर का अनुदान भी दे रहा है। गूगल की ओर से मंगलवार को जारी प्रेस बयान के अनुसार, वह स्वास्थ्य और कृषि के लिए बहुभाषी एआई संचालित एप्लिकेशन का समर्थन करने के लिए वधवानी एआई को 45 लाख डॉलर की वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है। कंपनी ने कहा, ये घोषणाएं एआई इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए गूगल की ओर से किए गए नए सहयोगों और वित्तीय प्रतिबद्धताओं की शृंखला को दर्शाती हैं।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Dec 17, 2025, 05:47 IST
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