Bihar News: दान की जमीन को रजिस्ट्री नहीं करवाने पर दाता ने स्कूल में लगाया ताला, चौथे दिन भी जारी रहा विरोध

वैशाली जिले के गोरौल प्रखंड अंतर्गत नगर पंचायत क्षेत्र स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, भटौलिया की जमीन रजिस्ट्री के प्रकरण को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार चौथे दिन भी जारी रहा। ग्रामीणों द्वारा विद्यालय में की गई तालाबंदी के कारण शैक्षणिक गतिविधियां पूरी तरह ठप हैं। प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई ठोस पहल नहीं होने से ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। विरोध के क्रम में सोमवार को ग्रामीणों ने विद्यालय के पोषक क्षेत्र में जिला प्रशासन का पुतला बनाकर जुलूस निकाला और प्रशासन विरोधी नारेबाजी की। इसके बाद विद्यालय परिसर में पुतला दहन किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की चुप्पी उसकी कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है और यह शिक्षा के प्रति घोर उदासीनता को दर्शाती है। कार्रवाई या दंड का भय ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 20 अक्तूबर 2024 से अब तक किसी भी संबंधित पदाधिकारी ने इस मामले में स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है। इससे सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगने लगे हैं। कुछ जनप्रतिनिधियों ने यहां तक कहना शुरू कर दिया है कि एनडीए को वोट देने का यही परिणाम है कि पदाधिकारी जनता की समस्याएं सुनने को तैयार नहीं हैं। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि निचले स्तर के अधिकारी उच्चाधिकारियों तक बात पहुंचाने में असफल रहते हैं, क्योंकि उन्हें कार्रवाई या दंड का भय बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला केवल जमीन रजिस्ट्री तक सीमित नहीं है। बीते वर्ष जनवरी माह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नगवा विकास यात्रा के दौरान जिले में 400 से अधिक योजनाओं का शिलान्यास किया गया था, जिनमें इस विद्यालय के विकास से संबंधित योजना भी शामिल थी। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर केवल बहाने बनाए जा रहे हैं। कभी अंचल अधिकारी द्वारा जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया में देरी की जाती है, तो कभी उनके अवकाश पर होने का हवाला दिया जाता है, जबकि अवकाश की स्थिति में भी राजस्व अधिकारी उपलब्ध रहते हैं। सरकारी कामकाज किसी एक पदाधिकारी की उपस्थिति पर निर्भर नहीं होना चाहिए। कड़ाके की ठंड में सड़क पर बैठने को मजबूर शिक्षक ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब डेढ़ साल में एक समस्या का समाधान नहीं हो सका, तो क्षेत्र का समग्र विकास कैसे संभव होगा। वर्तमान स्थिति यह है कि विद्यालय बंद है और तालाबंदी के कारण शिक्षक, विशेषकर महिला शिक्षक, कड़ाके की ठंड में सड़क पर बैठने को मजबूर हैं। वहीं ग्रामीण भी विद्यालय के मुख्य गेट पर डटे हुए हैं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि लगभग 65 वर्ष पूर्व जब यह सरकारी विद्यालय स्थापित हुआ था, तब स्थानीय प्रशासन या सरकार के नाम से दान पत्र अवश्य बनाया गया होगा। मौजूदा हालात गोरौल अंचल और प्रखंड कार्यालय की कार्यप्रणाली की पोल खोलते हैं। क्षेत्र में कुछ कर्मियों की लापरवाही के कारण सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण बढ़ रहा है, जबकि इस मामले में लोग स्वयं अपनी जमीन देने को तैयार हैं, लेकिन सरकारी तंत्र उसे लेने में रुचि नहीं दिखा रहा। ये भी पढ़ें-Bihar News: समग्र शिक्षा राशि के उपयोग में लापरवाही, 192 विद्यालयों से जवाब-तलब; क्यों बनी यह स्थिति जमीन रजिस्ट्री को लेकर कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी जमीन राज्यपाल के नाम निबंधित कराना चाहता है, तो उसे सबसे पहले जिला पदाधिकारी को निशुल्क निबंधन के लिए लिखित आवेदन देना होता है। आवेदन में जमीन की पूरी जानकारी अंकित होती है। इसके बाद अंचल कार्यालय द्वारा भौतिक सत्यापन कर रिपोर्ट डीसीएलआर के माध्यम से अनुमंडल पदाधिकारी और फिर अपर समाहर्ता को भेजी जाती है। सभी स्तरों से अनुमोदन के पश्चात अपर समाहर्ता द्वारा जिला पदाधिकारी को रजिस्ट्री का प्रस्ताव स्वीकृति हेतु भेजा जाता है।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 06, 2026, 11:14 IST
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