Sushil Modi: लालू का किला ढाहने वाले सुशील मोदी की जयंती आज, जानिए बिहार भाजपा की पहचान रहे सुमो की कहानी
नीतीश सरकारपूर्व उपमुख्यमंत्री दिवंगत सुशील मोदी की जयंती मना रहीहै। भाजप भी अपने वरिष्ठ नेता की याद मेंबिहार के हर जिले में कार्यक्रम का आयोजन लिया जा रहा है। पटना के एस. के. मेमोरियल हॉल जयंती समरोह मनाया गया। इस मौके पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, दोनों डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा समेत कई दिग्गज नेता जुटे। सभी ने सुशील मोदी की श्रद्धांजलि दी। आज बिहारवासी उन्हें याद कर रहे हैं। आइए जानते हैं बिहार की राजनीति में धुरंधर कहे जाने वाले सुशील मोदी के बारे में. दिवंगत सुशील मोदी की प्रशंसा केवल उनके दल के लोग ही नहीं करते थे। बल्कि उनके विरोध राष्ट्रीय जनता दल के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी भी खूब करते थे। उन्होंने कहा 1974 के जेपी आंदोलन से उपजे त्रिमूर्ति में से सुशील एक थे। लालू प्रसाद, नीतीश कुमार और सुशील मोदी तीनों जेपी आंदोलन से निकले और धीरे-धीरे इन लोगों ने बिहार की राजनीति की पुरानी पीढ़ी को अपदस्थ किया। लगभग तीस वर्षों से इन्हीं तीनों के हाथ में बिहार की राजनीति का नेतृत्व है। आज सुशील मोदी हम सबके बीच नहीं हैं। लेकिन, वह हमेशा याद आते रहेंगे। शिवानंद तिवारी ने आगे लिखा कि सुशील और मैं लगभग तीन महीना बांकीपुर जेल में एक साथ और एक ही सेल में रहा। हमलोगों में तीखा वैचारिक मतभेद रहा है। लेकिन, सबकुछ के बावजूद सुशील मोदी के साथ मेरा स्नेहिल संबंध बना रहा है। सुशील जुझारू नेता रहे हैं। हम उम्मीद करते हैं कि बीमारी के समक्ष भी सुशील मोदी का जुझारूपन बना रहेगा। हमारी दुआएं उनके साथ है। 15 साल में 11 बार बिहार का बजट भी पढ़ा महज 16 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े। संगठन के प्रति अपार निष्ठा से वह आरएसएस सदस्य बने रहे। 1973 में पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के महासचिव बने। वर्ष 1973 में बिहार प्रदेश छात्र संघर्ष समिति के सदस्य बने। जेपी आंदोलन हुआ तो सुशील मोदी भी इसमें कूद पड़े। कांग्रेस की सरकार ने इन्हें 19 महीने तक जेल में रखा। 1977 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् से जुड़े। कुछ महीनों तक पिता के साथ रेडिमेड की दुकान को भी संभाला। इसी बीच भाजपा ज्वाइन की। 1990 में भाजपा ने पटना केंद्रीय विधानसभा क्षेत्र से टिकट दिया। चुनाव जीते। मुख्य सचेतक भी बने। नवंबर 1996 में नेता प्रतिपक्ष बने। इसके बाद बिहार की राजनीति में उनका कद बढ़ता ही चला गया। 2000 में सात दिन के लिए नीतीश सरकार बनी तो मंत्री भी बने। इसके बाद फिर 2004 तक नेता प्रतिपक्ष बने रहे। इस दौरान सुशील लालू-राबड़ी सरकार के खिलाफ जनता की आवाज बन उभड़े। लगातार लालू परिवार के खिलाफ सबूत लेकर सामने आएं। आंकड़ों का ऐसा जादू चलाया कि लालू परिवार को काफी नुकसान पहुंचा। 2004 के लोकसभा चुनाव में सुशील मोदी भाजपा के टिकट पर भागलपुर से सांसद बने। 2005 में उन्होंने संसद सदस्यता से इस्तीफा दिया और बिहार सरकार में उपमुख्यमंत्री बने। विधान परिषद तब से वह विधान परिषद् के ही सदस्य थे। सुशील मोदी 2005 से 2013 और 2017 से 2020 तक बिहार के वित्त मंत्री रहे। इस दौरान उन्होंने 11 बार बिहार का बजट पढ़ा। Bihar Weather:बिहार के 19 जिलों में शीत दिवस और घने कोहरे का ऑरेंज अलर्ट, अगले दो दिनों में बढ़ेगी ठंड
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 05, 2026, 13:59 IST
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