बिहार: पेपरलेस जमीन रजिस्ट्री ने पकड़ी रफ्तार, रोज 110 दस्तावेजों का डिजिटल निबंधन; क्यूआर कोड से मिलेगी कॉपी

बिहार के नालंदा जिले में जमीन की रजिस्ट्री कराने का तरीका बदल रहा है। कागजी फाइलों और लंबी प्रक्रियाओं की जगह अब डिजिटल व्यवस्था ने ले ली है। पेपरलेस रजिस्ट्री को लेकर शुरुआती दौर में रही झिझक और भ्रांतियां अब कम हो रही हैं। इसका असर निबंधन कार्यालयों के आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है। जिले में रोजाना करीब 110 जमीनों की खरीद-बिक्री डिजिटल माध्यम से पूरी हो रही है। नई व्यवस्था में रजिस्ट्री के तुरंत बाद खरीदार को दस्तावेज की डिजिटल कॉपी भी उपलब्ध कराई जा रही है। बिहारशरीफ में रोजाना 65 से 70 दस्तावेजों का निबंधन जिले के बिहारशरीफ निबंधन कार्यालय में प्रतिदिन औसतन 65 से 70 दस्तावेजों का निबंधन किया जा रहा है। वहीं, हिलसा और राजगीर अनुमंडलीय निबंधन कार्यालयों के आंकड़ों को मिलाकर जिले में रोजाना करीब 110 दस्तावेजों का डिजिटल निबंधन हो रहा है। जिला अवर निबंधक मनीष कुमार के अनुसार, अगस्त 2026 से प्रभावी हुई पेपरलेस व्यवस्था का उद्देश्य रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और आम लोगों का समय बचाना है। पहले कागजी औपचारिकताओं और फाइलों के कारण लोगों को काफी समय देना पड़ता था। अब प्रक्रिया पहले की तुलना में आसान और तेज हो गई है। रजिस्ट्री पूरी होते ही खरीदार को मूल दस्तावेज सौंप दिया जाता है। एसएमएस और व्हाट्सएप पर तुरंत मिलेगी रजिस्टर्ड डीड की पीडीएफ नई व्यवस्था में खरीदार के निबंधित मोबाइल नंबर पर एसएमएसऔर व्हाट्सएप के माध्यम से सूचना भेजी जाती है। इसके साथ ही रजिस्टर्ड डीड की सुरक्षित पीडीएफ कॉपी भी उपलब्ध कराई जाती है। इससे दस्तावेज की डिजिटल प्रति हासिल करने के लिए दोबारा कार्यालय जाने की जरूरत नहीं पड़ती। कोड स्कैन करते ही खुल जाएगा जमीन का दस्तावेज डिजिटल डीड पर एक सुरक्षित क्यूआर कोड अंकित रहता है। इसे स्मार्टफोन से स्कैन करके दस्तावेज देखा, डाउनलोड और प्रिंट किया जा सकता है। मूल प्रति खो जाने की स्थिति में भी क्यूआर कोड के जरिए डिजिटल कॉपी प्राप्त करने की सुविधा मिलती है। अवर निबंधक के मुताबिक, दस्तावेजों पर प्राधिकृत डिजिटल हस्ताक्षर किए जाते हैं। डिजिटल रिकॉर्ड सर्वर पर सुरक्षित रखे जाते हैं, जिससे भविष्य में भी भू-स्वामी अपने दस्तावेज हासिल कर सकते हैं। विभाग का दावा है कि इस व्यवस्था से दस्तावेजों में छेड़छाड़ और फर्जीवाड़े की आशंका कम होगी। तकनीकी परेशानी दूर करने के लिए हेल्प डेस्क पेपरलेस रजिस्ट्री की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए निबंधन कार्यालय परिसर में विशेष हेल्प डेस्क बनाई गई है। यहां तैनात कर्मचारी क्रेता और विक्रेताओं को डिजिटल रजिस्ट्री से जुड़ी तकनीकी और कानूनी जानकारी दे रहे हैं। ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग, दस्तावेज अपलोड करने और रजिस्ट्री प्रक्रिया से जुड़ी शंकाओं का समाधान भी इसी डेस्क पर किया जा रहा है। इसका उद्देश्य लोगों को सीधे सरकारी सेवा का लाभ उपलब्ध कराना और बिचौलियों पर निर्भरता कम करना है।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Nov 01, 2026, 22:09 IST
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